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आत्मदाह की चेतावनी देने वाले ६ किसानो ने सजाई अपनी चिता

गुरुवार, 29 मार्च 2018

/ by News Anuppur
मामला भू अधिग्रहण के बाद कॉलरी प्रबंधन द्वारा मुआवजा व रोजगार न देने का
कोतमा। कोतमा तहसील क्षेत्र अंतर्गत ग्राम आमाडांड, निमहा, कुहका के किसानो की लगभग 1729  एकड जमीन को कॉलरी प्रबंधन द्वारा अधिग्रहण किया गया, लेकिन जमीन अधिग्रहण पर अब तक किसानो को रोजगार एवं मुआवजा नही दिया गया, जिसके बाद गरीबी से परेशान होकर आधा दर्जन से अधिक किसानो ने २१ मार्च को कॉलरी प्रबंधन सहित जिला प्रशासन व पुलिस प्रशासन को लिखित सूचना देते हुए ३१ मार्च आत्मदाह करने की चेतावनी दी थी। जिसके बाद ३० मार्च को आत्मदाह करने वाले 6 किसान जिनमें प्रेमलाल केवट, मथुरा प्रजापति निवासी ग्राम आमाडांड, बैशाखिया प्रजापति, अमृत लाल पुरी निवासी ग्राम निमहा, सुंदर केवट एवं जितेन्द्र त्रिपाठी निवासी ग्राम कुहका द्वारा गॉव मे अपनी ही चिता लकडी से सजा लिए है।  वहीं आत्मदाह करने वाले किसानो ने आरोप लगाते हुए कहा कि कालरी प्रबंधन द्वारा लगातार प्रशासन को झूठी शिकायत कर किसानो के खिलाफ दर्जनो मामले दर्ज करवाई है। जिस पर किसानो की नौकरी के साथ थानो में दर्ज मामलो को वापस लेने की मांग की गई है। ग्राम आमाडांड कुहका एवं निमहा के प्रभावित किसानो ने बताया कि आमाडांड खुली खदान खोले जाने को लेकर शासन द्वारा वर्ष 2004 से 1800 एकड जमीन का भू-अर्जन की कार्यवाही शुरू की गई, जिसमे 1729 एकड जमीन कृषको थी। जिसमे 1991,1998 भू अर्जन अधिनियम के प्रावधानो के तहत नौकरी एंव मुआवजा देने का भरोसा दिया गया था, लेकिन भूमि अधिग्रहण के बाद पीडित किसान, कालरी प्रबंधन एवं प्रशासन के बीच आए दिन नोक झोक होने लगी जिस पर कॉलरी प्रबंधन द्वारा प्रति 2 एकड जमीन मे एक नौकरी देने को लेकर 23 फरवरी 2009 को लिखित मे समझौता किया गया था, जिसके बाद 864 प्रभावितो को नौकरी देने की सहमति करने के बाद भी आज तक मात्र 500 लोगो को ही नौकरी दी गई, वही सैकडो किसान आज भी नौकरी एवं मुआवजा पाने परेशान है। जिसके बाद तीनो गांव के किसानो द्वारा 20 सितम्बर 2017 से क्रमिक अनशन जारी रखा, लेकिन इस ओर शासन प्रशासन द्वारा कोई ध्यान नही दिया गया, जिसके बाद 6 नवम्बर को बैलगाडी मे सवार होकर सैकडो किसानो द्वारा शिवकुमार शर्मा (राष्ट्रीय अध्यक्ष) के नेतृत्व मे एसडीएम कार्यालय का घेराव कर प्रदर्शन किया गया था।  जहां कॉलरी प्रबंधन व  जिला प्रशासन की लगातार आश्वासन से किसान रोजगार व नौकरी पाने परेशान है।
इनका कहना है
31 मार्च को प्रभावित किसानो के साथ जिला प्रशासन द्वारा ग्राम सभा लगाई जाएगी। पात्र किसानो की सूची बनाकर नौकरी दिलाने की प्रक्रिया की जाएगी।
मिलिंद नागदेवे, एसडीएम कोतमा

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