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जीने की आस छोड चुकी दिव्यांग जीने लगी सम्मान की जिंदगी

शुक्रवार, 20 अप्रैल 2018

/ by News Anuppur


आजीविका के समूह से जुड जुटाए रोजगार के संसाधन
अनूपपुर। जनपद पंचायत जैतहरी अंतर्गत ग्राम पंचायत खाड़ा में निवासी करने वाली महिला रोहणी सिंह दोनो पैर से दिव्यांग होने रही, जहां कक्षा १० वीं की पढ़ाई करने के बाद माता पिता द्वारा उसकी शादी शहडोल जिले के ग्राम गिरवा में रामखेलावन सिंह के साथ कर दी। जिसके बाद पति द्वारा शादी के कुछ दिनो बाद दिव्यांग रोहणी को उसके माता पिता के घर छोड चला गया। जहां रोहणी के माता पिता मजदूरी कर उसे और उसके भाई बहनो का पालन पोषण करते थे, वहीं गरीबी के कारण दो भाईयो व एक बहन ने भी अपनी पढ़ाई छोड दी थी।
माता पिता पर समझती थी बोझ
दोनो पैरो से विकलांग महिला रोहणी सिंह के माता पिता जहां मजदूरी कर उसका और अपने परिवार का भरण पोषण करते थे, वहीं मजदूरी से वे प्रति माह लगभग 2 से 3 हजार रूपए बचाते थे, जो परिवार के ही भरण पोषण व रोहणी के इलाज में खर्च हो जाता। गरीबी के कारण जहां रोहणी पिता को बीमार होने के बाद भी मजूदरी करने जाते देखती और अपने आप को अपने माता पिता पर ही बोझ समझने लगी और अपने जीने की ललक ही छोड़ दी थी।
समूह से जुड लिया ऋण, स्वयं बढ़ाई अपनी आय
जिसके बाद मैने गांव की महिलाओ को राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन द्वारा बनाए गए समूह से जुडते देखा और मै भी आजीविका के ग्राम नोडल अधिकारी संध्या मिश्रा से मिलकर स्व - सहायता समूह की गतिविधियो को जाना, जहां उन्होने मुझे आर्थिक रूप से स्वालंबन बनने की बात कही और दिसम्बर 2014 में मै राम स्व-सहायता समूह खाड़ा में जुडकर पहली बार 20 हजार रूपए समूह से ऋण प्राप्त कर उस रूपयो का उपयोग ईटा निर्माण के कार्य प्रारंभ किया, जिससे मुझे प्रतिमाह लगभग 5 से 6 हजार रूपए की आमदनी होने और इस बीच मेरे पति रामखेलाव सिंह भी मेरे पास आकर मेरे काम में हाथ बटाने लगे। जिसके बाद मै अपनी आय से अपने घर का भरण पोषण कर अपने माता पिता का सहयोग करने लगी और वर्ष 2016 में मैने समूह से लिया 20 हजार रूपए का ऋण भी ब्याज सहित चुकता कर दिया और पुन: वर्ष 2017 में मैने दोबारा 10 हजार रूपए का ऋण लिया और उस रूपए का उपयोग महिला ने अपनी बंजर भूमि को उपजाऊ बनाते हुए परिवार के साथ मिल खेती करवाने लगी। जिससे मेरी आय खेती से भी 3 से 4 हजार रूपए प्रतिमाह होने लगी।
समाज में मिला सम्मान
राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन द्वारा बनाए गए समूह से जुडने के बाद की गई गतिविधियो जिसमें ईटा निर्माण और कृषि से जहां रोहणी पति रामखेलाव की आय आज लगभग 8 से 9 हजार रूपए प्रतिमाह होने लगी। जिसके बाद से परिवार और समाज मुझे अब सम्मान की दृष्टि से देखने लगा है। वहीं समूह से जुडने के बाद मेरे द्वारा लिए गए 20 हजार के ऋण पर ईटा निर्माण पर मेरे पति राम खेलावन सिंह और मेरे माता-पिता तथा भाई बहन मेरे कार्य में हाथ बटाने लगे। इसके साथ ही मै भी अब अपने परिवार के भरण पोषण में सहयोग करने लगी, जिससे आज रोहणी अपने माता पिता और भाई बहनो के साथ समाज में सम्मान के साथ रही है।
मॉ को भी समूह से जोड बनाया सशक्त
वहीं दोनो पैरो से दिव्यांग महिला रोहणी सिंह समूह से जुड कर अपने आय का साधन स्वयं जुटाने के बाद अपनी मॉ गुड्डी बाई को भी आजीविका मिशन की राम स्व-सहायता समूह से जोडकर समूह से दो बार में 15 हजार रूपए का ऋण दिलाया, तथा उस ऋण का उपयोग अपनी बेटी रोहणी द्वारा किए जा रहे कृषि और ईटा निर्माण कार्य पर लगा आर्थिक रूप से सशक्त बनी हुई है। समूह से जुडने के बाद आज जहां रोहणी का पूरा परिवार समाज में सम्मान जनक जिंदगी जी रहा है वहीं दिव्यांग रोहणी को देख गांव की अन्य महिलाओ ने भी समूह से जुड अपने आप को अर्थिक रूप से सशक्त बनाने में लगी हुई है। 

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