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मेरे मित्र बिसाहूलाल ने मेरे ऊपर चलाया पहला बाण, शुरूआत उन्होने पहले की मैने नही - पूर्व विधानसभा अध्यक्ष एन.पी. प्रजापति

मेरे मित्र बिसाहूलाल ने मेरे ऊपर चलाया पहला बाण, शुरूआत उन्होने पहले की मैने नही - पूर्व विधानसभा अध्यक्ष एन.पी. प्रजापति

Friday, July 10, 2020

/ by News Anuppur

आजादी के बाद लोकतंत्र में साढ़े आठ सौ करोड़ में विधायको की खरीदी का हुआ पहला भ्रष्टाचार
अनूपपुर। आगामी विधानसभा अनूपपुर के उपचुनाव की तैयारियों को लेकर 10 जुलाई को पूर्व विधानसभा अध्यक्ष एन.पी. प्रजापति प्रभारी विधानसभा उप चुनाव अनूपपुर द्वारा नवीन सर्किट हाउस में पत्रकार वर्ता का आयोजन किया गया, जहां उनके साथ विधायक नारायण पट्टा, भूपेन्द्र सिंह मरावी, बसंत सिंह एवं पूर्व विधायक मधु भगत उपस्थित रही। पत्रकार वर्ता के दौरान पूर्व विधानसभा अध्यक्ष एन.पी. प्रजपति ने कैबिनेट मंत्री बिसाहूलाल सिंह, मुख्यमंत्री शिवराज सिंह सहित ज्योतिरादित्य सिंधिया के खिलाफ जमकर निशाना साधा। उन्होने कहा कि पांच साल के लिए प्रतिनिधि चुने जाते है, ऐसा लोकतंत्र में होता है। लेकिन बीच में एैसा क्या हो जाता है कि आपको लेखनी क्यो चलानी पड़ती है, हमे क्यो आना पड़ता है। ये विषय उनके साथ समाहित हो जाती है, जब लोकतंत्र की बात आती है। 1980 में यहां के प्रत्याशी को कांग्रेस ने पहली बार टिकट दिया, कांग्रेस ने पैसा लगाया, कार्यकर्ताओं ने लड़ाई लड़ी जिसके कारण वे जीत के आए और लगातार विभिन्न पदों में मंत्री रहे किन्तु इस उम्र में आकर अगर लोभ में कोई चीज परिवर्तित हो जाए और परिवर्तित होकर लालच में आकर अपना ठीकाना ढूंढ ले और कुछ लोग भोपाल से दिल्ली और बैंगलोर जाते है, जहां भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जे.पी. नड्डा पहुंचते है। विधायको को पूर्व विधायको द्वारा उन्हे बंद कर रखा जाता है। शिवराज सिंह चैहान सुप्रिम कोर्ट में याचिका दायर करते है कि 22 विधायक विधानसभा अध्यक्ष के सामने नही आना चाहते और इनका इस्तिफा स्वीकार किया जाए और इसकी पैरवी करते है सिंह, सिर्फ पीछे से बोल देना की इसमें मेरा कोई हाथ नही तो फिर क्यो गए थे विधानसभा अध्यक्ष के खिलाफ सुप्रिम कोर्ट ?

साढ़े आठ सौ करोड़ में विधायको की खरीदी का हुआ भ्रष्टाचार

श्री प्रजापति ने कहा मैने 22 विधायको में से 6 विधायको का इस्तिफा लिया, क्योकि वे 6 मंत्री थे और राज्यपाल ने उनके मंत्री होते हुए पद और गोपनियता के खिलाफ जाकर कृत्य किये थे, जिनके सीन के आधार पर मैने उन्हे हटा दिया, लेकिन जब सूचनाएं मिली की वे प्लेन में चढ़ने वाले है और विधानसभा आने वाले फिर उतर गए है। उसके बाद सौदा हुआ बात 26 की हुई और अगर भारतीय जनता पार्टी ज्वाइन करते है तो 10 और देगे, जो मंत्री थे वे बोले हम मंत्री पद से जा रहे है तो उन्हे कहा गया कि उन्हे 50 मिलेगा। लोकतंत्र में सौदाबाजी आजादी के बाद पहली बार देखने को मिली, जो लगभग साढ़े आठ सौ करोड़ का पहला भ्रष्टाचार हुआ। भारतीय जनता पार्टी ने 15 वर्षो में जो कमाई की उसका एक छोटा सा खुरचन विधायको को खरीदने में झोंक दिया। उसमें से एक प्रतिनिधि अनूपपुर का भी है।

पहला तीर बिसाहूलाल ने मेरे ऊपर चलाया

श्री प्रजापति ने कहा की बिसाहूलाल और हम मित्र थे, तो उस मित्र को यह सोचना गद्दारी करने से पहले सोचना था कि मेरा मित्र विधानसभा अध्यक्ष नही रहेगा। पहला तीर बिसाहूलाल ने मेरे ऊपर चलाया। श्री प्रजापति ने कहा की अर्जुन ने पूछा श्री कृष्ण से की हे प्रभु यह आप क्या कर रहे है। यहां तो काका, चाचा, बाबा खड़े है। तो श्री कृष्ण कहते चिंता मत करो पहला बाण उन्होने चलाया है। शुरूआत उन्होने पहले की मैने नही। न्याय और अन्याय, पाप और पुण्य सनातन धर्म के अंग है। उन्होने जो कृत्य किया है वो पाप का कृत्य किया है। फिर तो ये होगा चुनाव लड़ो , आप प्रेस वाले सबकी बाइट लो। आपकी बाइटें एक तरफ, जीता हुआ प्रतिनिधि एक तरफ, हजार दो हजार करोड़ एकठ्ठा करो 25-50 विधायको को खरीद लो और सरकार बदल दो, फिर लोकतंत्र में  चुनाव की आवश्यकता क्या है।

लेकतंत्र को मारने के लिए भाजपा ने चलाया पैतरा

लेकतंत्र को मारने के लिए एैसा पैतरा भारतीय जनता पार्टी ने बनाया और उसके पीछे भारतीय जनता पार्टी चलाने वाले संगठन के आदर्श, उनकी नैतिकता, उनका चाल, उनका चरित्र कहा चला गया। जो सामजिक संगठनो के माध्यम से बड़ी-बड़ी बात करते है वो भी शांत होकर उनकी तरफ्दारी करने लगे और तो और विड़म्बना वहां हुई जब विधानसभा अध्यक्ष अपने आप में उस क्षेत्राधिकार का न्यायापालिका होता है। विधानसभा अध्यक्ष होने की हैसियत से मैने निर्णय लिया की कोरोना ने देश में दस्तक दे चुकी थी, महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़, राजस्थान, उड़ीसा इन्होने अपनी विधानसभा स्थगित कर दी थी, तो मैने भी 16 तारीख को जो विषय थे उसे लिए, राज्यपाल का अभिभाषण होना था जो किया और उसके बाद अन्य राज्यो की स्थिति के संबंध से अवगत कराते हुए विधानसभा 10 दिनों के लिए आगे बढ़ा दी, लेकिन विडम्बना वहां होती है जब राज्यपाल उस पर ध्यान नही देते है और उच्च न्यायापालिका जहां पर हमारे वकील बोलते है कि देश में कोरोना ने दस्तक दे दिया है जो विश्व में महामारी के रूप में फैल रहा है, लेकिन कोई ध्यान नही दिया गया। पूरे मामले में लोकतंत्र और संविधान को दरकिनार कर दिया गया, संविधान मौन हो गया लगभग 20 हजार से ऊपर देष में मृत्यु हो गई। खुले रूप में इसकी जवाबदारी केन्द्र सरकार को बोलता हूॅ की आप एक सरकार के चलते पूरे देश को कोरोना में झोंक दिया है, जिसके जवाबदार आप है।

कैबिनेट मंत्री बिसाहूलाल पर साधा निशाना

श्री प्रजापति ने कहा हम अभी तो अपने विधायको के साथ आए है, हम ये बताने आए है की क्या यही लोकतंत्र है। पैसा खा के अपने आप को इस्तिफा दे दिया। क्या आपने अनूपपुर की आम मतदाता से पूछा की मै इस्तिफा दे रहा हॅू, 50 खा रहा हॅू, क्या आप लोग इससे सहमत है की मै इस्तिफा देकर फिर से चुनाव लड़ने आऊं। जिस मतदाता ने आपको चुनकर यहां तक पहुंचाया था उनसे तो पूछ लेते। आपको कांग्रेस ने इतनी बार मंत्री बनाया था, लेकिन अभी आप तीन महीने तक लटके रहे और अभी तक विभाग भी नही मिल पाया है। कल को आदर्श आचार संहिता लग जाएगा, क्यो करोगे और तुम तो पांच साल के लिए विधायक बने थे, अब तो 2 माह बाद विधायक भी नही रहोगे और न ही मंत्री रहोगे। अगर हमारे साथ रहते तो देर सवेर मंत्री तो बन जाते। आपने कितना बड़ा छल कपट किया है, बैठे-बैठे ये नही सोचा की इस उम्र में आकर क्या लड़पन कर रहे हो। सोचो आप क्या दिशा दोगे, राजनीति में क्या दिखाना चाह रहे हो, आप तो बहुत वरिष्ठ थे आपको एैसा कृत्य शोभा दे रहा है क्या ?

संविधान और लोकतंत्र का उड़ाया गया माखौल

मुख्यमंत्री पर निशाना साधते हुए श्री प्रजापति ने कहा कि एैसा कृत्य तो मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान  ने भी किया है, जो एक महीने तक अकेले मुख्यमंत्री रहे, उसके बाद पांच मंत्री और उसके बाद 2 जुलाई को तीन महीने बाद पूरे मंत्री लेकिन 10 दिनो तक काई विभाग नही दिया गया। ये संविधान और लोकतंत्र का माखौल नही तो और क्या है। हम भविष्य में क्या परोसना चाह रहे है, इस म.प्र. के माध्यम से राष्ट्र को क्या दिशा देना चाहते है। एक और चंबल क्षेत्र कोई आया जो हमसे बहुत बड़ा छलकपट करके गया। पता नही अपने आप को कौन से जानवर का नाम दिया। लेकिन हमे बाद में पता चला की अस्तिन में अजगर छिपा बैठा है। सतयुग, द्वापर युग, त्रेतायुग में बड़े-बड़े योद्धा, राजा - महाराजा देखे गए, लेकिन कलयुग में पहली बार किसी महाराजा को अपने ही लोगो के साथ बिकते देखा, इससे बड़ा पाप और कुछ नही हो सकता। मै पूछता हॅू की भ्रष्टाचार तो इन लोगो ने विधायको को खरीद कर किया अब विभाग क्यो नही बंट रहे है। किसको कौन सी मलाई चाहिए थी जो बंटवारे में इतना समय लगा। रही बात भ्रष्टाचार की तो क्या आपके गोविंद ने राजस्व में भ्रष्टाचार नही किया, आपके तुलसी सिलावट ने स्वास्थ्य में भ्रष्टाचार नही किया, कुएं में कूदने वालो ने महिला बाल विकास में नही किया, तुम्हारे ही सभी लोग ये कृत्य कर रहे थे।

जो बिके वहीं लोग मंत्री बने

श्री प्रजापति ने कहा और यही तो प्रमाण है जो बिके वहीं मंत्री बने, उन्होने कहा की शिवराज बोलते है कि हमने कांग्रेस सरकार गिराई, ये तो बाद की बात है। मेरे पास तो प्रमाण है, सुप्रिम कोर्ट का कि शिवराज सिंह चौहान ने उन 22 विधायको के पक्ष में उनके हस्ताक्षर करवाए और विधानसभा अध्यक्ष के खिलाफ कोर्ट में नोटिस जारी करवाया किये विधायक आपके सम्मुख पेष नही होगे, इनका इस्तिफा स्वीकार करो, जिसमें सुप्रिम कोर्ट ने कहा नही ये अध्यक्ष से संबंधित है आप उनके पास जाइए।


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