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गांजा तस्करी करने वाले तीनों आरोपियों की जमानत याचिका खारिज

गांजा तस्करी करने वाले तीनों आरोपियों की जमानत याचिका खारिज

गुरुवार, 20 अगस्त 2020

/ by News Anuppur
21 किलोग्राम गांजे का अवैध परिवहन करते पुलिस ने किया था गिरफ्तार
अनूपपुर। गांजे का अवैध पविहन करने वाले आरोपी कमलेश चंद्रवंशी, सूरज चंद्रवंशी एवं दिलीप कुमार चंद्रवंशी निवासी वार्ड क्रमांक 2 बंधाटोला, नौगंवा अनूपपुर की जमानत याचिका विशेष न्यायाधीश एनडीपीएस एक्ट राजेश कुमार अग्रवाल के न्यायालय से खारिज कर दी गई। राज्य की ओर से जमानत आवेदन का विरोध अतिरिक्त लोक अभियोजक सुधा शर्मा के द्वारा इस आधार पर किया गया कि आरोपियों द्वारा किया गया अपराध गंभीर प्रकृत्ति का है। आरोपियों के विरूद्ध थाना अमरकंटक में 91/20 धारा 8/20 एनडीपीएस एक्ट का मामला पंजीबद्ध है आरोपीगण दो मोटरसाईकिलों पर अलग-अलग बोरियों में दो-दो पैकेट पीछें बांधकर कुल 21 किलो गांजे का अवैध परिवहन कर रहे थे। कोविड-19 जैसी महामारी के समय इस तरह का अपराध गंभीर प्रकृत्ति का रूप धारण कर लेता है। यदि आरोपीगणों का जमानत का लाभ दिया जाता है तो वो अपराध की पुनरावृत्ति करने के साथ ही साक्ष्य को प्रभावित कर सकते हैं।

घटना की जानकारी देते हुए मीडिया प्रभारी अभियोजन राकेश पांडेय ने बताया कि 19 जून को आरोपीगण दो मोटर साईकिल पर एक साथ एक-एक बोरी में दो-दो पैकेट भरकर केरियर पर बांधकर मादक पदार्थ 21 किलो गांजे का अवैध रूप से परिवहन कर रहे थे, जिनकों मौके पर अमरकंटक पुलिस द्वारा जब्त की जाकर कार्यवाही की जाकर विवेचना पश्चात मामला न्यायालय में प्रस्तुत किया गया था।

आरोपीगण द्वारा जमानत आवेदन में यह तर्क प्रस्तुत किया गया कि अमरकंटक पुलिस द्वारा उनकों झूठा फंसाय गया है। आवेदकगण के कब्जे से कोई गांजा पदार्थ जब्त नहीं हुआ है। उनका अमरकंटक थाने के मुंशी से उनका विवाद हुआ था एवं मुंशी ने उनकी जाति को आधार बनाकर गालियां दी थी, जिसकी शिकायत लिखाने वो राजेन्द्रग्राम थाने गए थे पर पुलिस ने रिपोर्ट नहीं लिखी थी। अमरकंटक मुंशी द्वारा उनको अक्सर गांजे के मामले में फंसाने की धमकी दी जाती थी बाद में उनके द्वारा एक शिकायत आवेदन हरिजन थाना प्रभारी अनूपपुर को दिया गया था, जिस कारण उनको झूठे केस में फंसाया गया है। न्यायालय द्वारा शिकायत के विश्वसनीय न होने तथा अपराध पंजीबद्ध होने के बाद प्रतीत होने तथा अतिरिक्त लोक अभियोजक के तर्को से सहमत होकर जमानत याचिका खारिज कर दी गई।

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