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रेत के अवैध व्यवसाय में शामिल शिक्षक अशोक सिंह को खनिज विभाग ने थमाया नोटिस

रेत के अवैध व्यवसाय में शामिल शिक्षक अशोक सिंह को खनिज विभाग ने थमाया नोटिस

बुधवार, 12 अगस्त 2020

/ by News Anuppur

नोटिस के बाद भी प्रशासन ने दिया अभयदान, शासकीय सेवक पर कार्यवाही ठंडे बस्ते में  

 शिक्षक जो की समाज सहित व्यक्ति को शिक्षा और ज्ञान के माध्यम से उनके चरित्र का निर्माण करता है, जिससे एक आदर्श समाज के निर्माण में भी शिक्षको की महत्वपूर्ण भूमिका होती है, लोग शिक्षक को गुरू मानकर उनकी पूजा करते है। एक अच्छा शिक्षक हमारे समस्याओ का समाधान नही बताता है बल्कि उस समस्या का कैसे समाधान किया जाए यह सिखाता है। लेकिन अनूपपुर जिले के कुछ शिक्षको रेत के अवैध कार्यो में संलिप्ता के बाद उन्हे माफिया की संज्ञा दी जाने लगी है। जो बच्चो को शिक्षित करने के बजाय रेत के अवैध व्यवसाय में संलिप्त है।

अनूपपुर। वर्षाकाल के दौरान रेत के उत्खनन पर पूर्णरूप से प्रतिबंध के बावजूद जिले के नदियो से रेत के अवैध उत्खनन एवं परिवहन के मामला लगातार सुर्खियो में रहा है। इस खेल में शासकीय सेवक भी पीछे नही है, जो अपनी शासकीय सेवा की शर्तो का उल्लंघन करते हुए रेत के अवैध उत्खनन एवं परिवहन में संलिप्त होने पर कलेक्टर ने शासकीय माध्यमिक शाला पैरीचुआ के प्रधानाध्यापक दीपक तिवारी को रेत के अवैध उत्खनन मामले में सोशल मीडियो में वाॅयरल हुए वीडियो में प्रमाणित पाते हुए निलंबित किया जा चुका है, वहीं सोशल मीडिया में रेत उत्खनन एवं परिवहन से संबंधित टोकन के मामले में प्राथमिक विद्यालय थानगांव के शिक्षक अशोक सिंह को खनिज विभाग ने नोटिस जारी कर स्पष्टीकरण मांगा गया है, लेकिन अब तक इन पर कोई कार्यवाही नही हो सकी है।

शिक्षक अशोक सिंह के अवैध व्यवसाय पर नही हुई कार्यवाही

जिले में रेत के अवैध कार्यो में संलग्न को रेत माफिया की संज्ञा दी जाने लगी है, जहां शासकीय प्राथमिक विद्यालय जुनहा टोला थानगांव में पदस्थ सहायक अध्यापक अशोक सिंह बच्चो को शिक्षित करने की जगह रेत के अवैध व्यवसाय में संलिप्त है। जिस पर खनिज विभाग ने अशोक सिंह पिता शिव मंगल सिंह निवासी थानगांव को टोकन मामले में नोटिस जारी कर स्पष्टीकरण मांगा गया था। जिसमें ट्रैक्टर क्रमांक एमपी 65 एए 0794 में रेत परिवहन हेतु जारी किए गए टोकन में ट्रैक्टर चालक सेमलाल, गतंव्य स्थल धर्मशाला बिजुरी, खदान में प्रवेश का समय 1 बजे तथा निकासी का समय दोपहर 1.25 बजे, मूल्य 1500 खदान का नाम गुलीडांड तथा टोकन जारीकर्ता संदीप सिंह के हस्ताक्षर पाए गए। जानकारी के अनुसार उक्त ट्रैक्टर अशोक सिंह के नाम पर ही रजिस्टर्ड है। जिस पर खनिज विभाग ने आदेश क्रमांक 795 दिनांक 30 जून के अनुसार 1 जुलाई से 1 अक्टूबर की अवधि में वर्षाकाल होने के कारण रेत उत्खनन पूर्णरूपेण प्रतिबंधित होने के बावजूद उक्त टोकन के माध्यम से अवैध रूप से उत्खनन किए गए रेत का परिवहन कराया जाना अथवा कराए जाने का प्रयास करना पाए जाने पर जवाब मांगा गया है। लेकिन इस पूरे मामले में अब शासकीय सेवा में रहते हुए रेत के अवैध व्यवसाय में सलिप्त होने पर अब तक कोई कार्यवाही नही हो सकी है।

आखिर प्रशासन ने क्यो दिया अब तक अभयदान

मामले की जानकारी के अनुसार शिक्षक अशोक सिंह के रेत के अवैध व्यवसाय में शामिल होने एवं खनिज विभाग द्वारा नोटिस जारी किए जाने के बाद भी जिला प्रशासन ने अब तक कोई कार्यवाही नही की है। जबकि अशोक सिंह के नाम से रजिस्टर्ड ट्रैक्टर क्रमांक एमपी 65 एए 0794 है। वहीं सोशल मीडिया में वाॅयरल हुए अवैध टोकन में उनके ट्रैक्टर का नंबर व चालक का नाम स्पष्ट है। वहीं प्राथमिक विद्यालय के सहायक अध्यापक होने के साथ ही उनके द्वारा रेत के अवैध व्यवसाय में शामिल होना गंभीर मामला है। ऐसे शासकीय सेवक पर कार्यवाही आवश्यक है, जो शासकीय सेवक के रूप में रहकर शासकीय सेवक के सेवा शर्तो का उल्लंघन किया गया है।

रेत मामले में शासकीय षिक्षक दीपक तिवारी हो चुके है निलंबित

जिले के कोतमा तहसील अंतर्गत केवई नदी स्थित चंगेरी घाट में रेत के अवैध परिवहन को लेकर हुए विवाद और दूसरे दिन सोशल मीडिया में वाॅयरल वीडियो पर 6 अगस्त को कलेक्टर ने शासकीय माध्यमिक शाला पैरीचुआ के प्रधानाध्यापक दीपक तिवारी को रेत का अवैध उत्खनन किया जाना प्रमाणित पाते हुए निलंबित कर दिया गया। जहां उक्त शिक्षक के द्वारा प्रशासन की धौंस दिखाकर विवाद करने के मामले में खनिज विभाग ने कारण बताओं नोटिस जारी करते हुए निर्धारित समय पर जवाब प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए थे। जिस पर कलेक्टर ने विकासखंड शिक्षा अधिकारी कोतमा द्वारा प्रेषित प्रतिवेदन के आधार पर माध्यमिक शाला पैरीचुआ द्वारा अवैध रेत उत्खनन किया जाना प्रमाणित पाया पाते हुए जहां दीपक तिवारी शासकीय सेवक होते हुए अवैध रेत उत्खनन कर व्यवसाय किया जाना शासकीय सेवक के सेवा शर्तो एवं म.प्र. सिविल आचरण नियम 1965 के नियम 3 के विपरीत होने से दंडनीय होने पर कलेक्टर ने म.प्र. सिविल सेवा (वर्गीकरण नियंत्रण तथा अपील) नियम 1966 के नियम 9 के तहत तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया था।

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