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नाबालिग से दुष्कर्म के आरोपी को 20 वर्ष का सश्रम कारावास

नाबालिग से दुष्कर्म के आरोपी को 20 वर्ष का सश्रम कारावास

शनिवार, 23 अक्तूबर 2021

/ by News Anuppur

आरेापी ने पीडि़ता को कई दिनो तक रखा था अपने कब्जे में

अनूपपुर। न्यायालय अपर सत्र न्यायाधीश राजेन्द्रग्राम अविनाश शर्मा के न्यायालय ने न्यायालय के प्रकरण क्रमांक 53/2017 की सुनवाई पूरी करते हुए आरोपी कमलेश सिंह पिता कोले सिंह उम्र 24 निवासी ग्राम गिरदाबल टोला दमेहडी थाना करनपठार को 20 वर्ष का सश्रम कारावास एवं 40 हजार के अर्थदंड से दंडित किया गया है। राज्य की ओर से विशेष लोक अभियोजक शशि धुर्वे ने राज्य का पक्ष रखा।

 मीडिया प्रभारी अभियोजन अनूपपुर राकेश कुमार पांडेय ने जानकारी देते हुए बताया कि 11 अप्रैल 2017 की रात लगभग 11 बजे जब पीडि़ता अपने घर के सामने स्थित कुआं के पास गई तो वहां पर खड़े अभियुक्त कमलेश सिंह मरावी ने उसे पकड लिया और जान से मारने की धमकी देते हुए उसके साथ गलत काम किया और उसे जान से मारने की धमकी देते हुए रातभर वही रखा तथा सुबह बस में बैठाकर अपने दोस्त के घर ले गया। अभियुक्त ने पीडि़ता को अपने दोस्त के घर लगभग 1 सप्ताह तक रखा, उसके पश्चात आरोपी ने उसे अनूपपुर के एक अन्य गांव में ले जाकर रखा जहां आरोपी के साथ उसके दोस्त व दोस्त की पत्नी भी गये थे, जब आरोपी को पता चला कि पीडि़ता को उसके माता-पिता ढूढऩे आने वाले है तो वह ऑटो से पीडि़ता को अमलाई रेलवे स्टेशन ले आया, अमलाई स्टेशन से आरोपी ने पीडि़ता को रायपुर में किसी जगह पर रखा। आरोपी ने पीडि़ता को गोरखपुर ले जाकर कुछ दिन तक रखा तथा उसके साथ इस दौरान गलत काम करता रहा। जब वह विरोध करती तो पीडि़ता के साथ आरोपी मारपीट करता था। 16 मई 2017 को पीडि़ता के पिता एवं मामा उसे रायपुर लेने गये और उसे लेकर वापिस आये। पीडि़ता की रिपोर्ट पर आरोपी के विरूद्व थाना राजेन्द्रग्राम में अपराध क्रमांक 72/17 के तहत नाबालिग लडकी से बलात्कार का मामला पंजीबद्व हुआ।

प्रकरण की विवेचना उपनिरीक्षक मीना आर्मो द्वारा की गई। उप निरीक्षक मीना आर्मो ने संपूर्ण विवेचना के पश्चात विचारण हेतु मामला न्यायालय में पेश किया। प्रकरण के निराकरण में न्यायालय में कोर्ट मोहर्रिर आनंदी प्रसाद एवं आरक्षक मतगेन्द्र पटैल का विशेष सहयोग रहा। इन्होने न्यायालय द्वारा जारी किये गये आदेशिकाओं का यथा संभव त्वरित तामील कराया, साक्षियों को न्यायालय में प्रस्तुत होने एवं साक्ष्य पूर्ण होने तक इनका विशेष सहयोग रहा। न्यायालय ने विशेष लोक अभियोजक शशि धुर्वे ने क्रमबद्ध तरीके से सभी साक्षियों का साक्ष्य न्यायालय में अंकित कराया तथा आवश्यक सभी दस्तावेजों को प्रमाणित कराया जिस पर न्यायालय ने आरोपीगणों को उपरोक्त दंड से दंडित करने का आदेश पारित किया। मामला 12 वर्षीय नव युवती पीडि़ता से संबंधित होने के कारण जिला अभियोजन अधिकारी रामनरेश गिरि ने समय-समय पर प्रकरण के विचारण के दौरान प्रकरण की समीक्षा करते हुए आवश्यक सुझाव एवं दिशा-निर्देश दिये।

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