२३५ किसानों से १८८ हेक्टयेर भूमि का कॉलरी ने किया था अधिग्रहण, ३ साल से आश्वासनों के फेर में भटक रहे किसान
सुमिता शर्मा/राजनगर। एसईसीएल हसदेव क्षेत्र अंतर्गत कोरजा भूमिगत कोयला खदान में किसानो को अधिग्रहित जमीनो के बदले मुआवजा और रोजगार न मिलने से किसानो में नाराजगी व्याप्त है। जिसमें बार बार प्रशासन सहित कॉलरी प्रशासन को दिए गए ज्ञापन और आश्वासनों के बाद भी पिछले तीन साल से किसानों को उनके करारनामे के तहत मुआवजा और नौकरी नहीं मिल पाई है। वहीं समस्याओं के निराकरण के लिए अनूपपुर जिला प्रभारी मंत्री संजय पाठक द्वारा किसानों, जिला प्रशासन और कॉलरी प्रबंधन के बीच विवादों विशेष बैठक बुलाने का भी आश्वासन दिया गया। लेकिन बुलाई गई तीनों बैठकों से खुद एक भी बैठक में शामिल नहीं हुए। जिसके उपरांत प्रभावित किसानो ने १७ सितम्बर को आमसभा का आयेाजन किया। जिसमें उन्होने बताया कि कोरजा भूमिगत कोयला खदान में कोरजा दलदल, पडऱीपानी और रेउदा ग्राम के 235 किसानों की १८८ हेक्टेयर जमीनों का अधिग्रहण वर्ष 2014 में भारत सरकार के गजट नोटिफिकेशन के बाद किया गया था। जिसमें सभी प्रभावित किसानो को कॉलरी प्रबंधन द्वारा नोटिस देकर राजस्व अमले की मौजूदगी मे जमीनो का सर्वे करवाकर किसानो को अधिग्रहित जमीनो के बदले मुआवजा और रोजगार देने का आश्वसन दिया गया था। लेकिन 3 वर्ष बीत जाने के बाद भी किसानों को अब तक न तो मुआवजा दिया गया और न रोजगार उपलब्ध कराया गया। जिसके सभी प्रभावित किसानो ने लामबंद होकर विगत 9 जनवरी से १७ दिवस तक कोरजा कॉलरी के मुख्य द्वार पर भूख हडताल की गई। जिसके बाद कोतमा एसडीएम, तहसीलदार तथा एसडीओपी कोतमा ने किसानो के लिए जल्द मुआवजा और रोजगार दिलाने का लिखित आश्वासन उप क्षेत्रीय प्रबंधक कोरजा से कराकर दिया गया। साथ ही 4 माह के अंदर सभी प्रभावित किसानो को मुआवजे का भुगतान किए जाने की बात कही गई। इस बीच कृषि मंत्री गौरी शंकर बिसेन को लिखित ज्ञापन देकर जल्द मुआवजा और रोजगार दिलाने की मांग की मंत्री, प्रभारी मंत्री संजय सतेंद्र पाठक से सभी प्रभावित किसानो ने लिखित ज्ञापन देकर न्याय की गुहार लगाई गई। लेकिन आज भी २३५ किसान मुआवजे के अभाव में मायूस है।
सुमिता शर्मा/राजनगर। एसईसीएल हसदेव क्षेत्र अंतर्गत कोरजा भूमिगत कोयला खदान में किसानो को अधिग्रहित जमीनो के बदले मुआवजा और रोजगार न मिलने से किसानो में नाराजगी व्याप्त है। जिसमें बार बार प्रशासन सहित कॉलरी प्रशासन को दिए गए ज्ञापन और आश्वासनों के बाद भी पिछले तीन साल से किसानों को उनके करारनामे के तहत मुआवजा और नौकरी नहीं मिल पाई है। वहीं समस्याओं के निराकरण के लिए अनूपपुर जिला प्रभारी मंत्री संजय पाठक द्वारा किसानों, जिला प्रशासन और कॉलरी प्रबंधन के बीच विवादों विशेष बैठक बुलाने का भी आश्वासन दिया गया। लेकिन बुलाई गई तीनों बैठकों से खुद एक भी बैठक में शामिल नहीं हुए। जिसके उपरांत प्रभावित किसानो ने १७ सितम्बर को आमसभा का आयेाजन किया। जिसमें उन्होने बताया कि कोरजा भूमिगत कोयला खदान में कोरजा दलदल, पडऱीपानी और रेउदा ग्राम के 235 किसानों की १८८ हेक्टेयर जमीनों का अधिग्रहण वर्ष 2014 में भारत सरकार के गजट नोटिफिकेशन के बाद किया गया था। जिसमें सभी प्रभावित किसानो को कॉलरी प्रबंधन द्वारा नोटिस देकर राजस्व अमले की मौजूदगी मे जमीनो का सर्वे करवाकर किसानो को अधिग्रहित जमीनो के बदले मुआवजा और रोजगार देने का आश्वसन दिया गया था। लेकिन 3 वर्ष बीत जाने के बाद भी किसानों को अब तक न तो मुआवजा दिया गया और न रोजगार उपलब्ध कराया गया। जिसके सभी प्रभावित किसानो ने लामबंद होकर विगत 9 जनवरी से १७ दिवस तक कोरजा कॉलरी के मुख्य द्वार पर भूख हडताल की गई। जिसके बाद कोतमा एसडीएम, तहसीलदार तथा एसडीओपी कोतमा ने किसानो के लिए जल्द मुआवजा और रोजगार दिलाने का लिखित आश्वासन उप क्षेत्रीय प्रबंधक कोरजा से कराकर दिया गया। साथ ही 4 माह के अंदर सभी प्रभावित किसानो को मुआवजे का भुगतान किए जाने की बात कही गई। इस बीच कृषि मंत्री गौरी शंकर बिसेन को लिखित ज्ञापन देकर जल्द मुआवजा और रोजगार दिलाने की मांग की मंत्री, प्रभारी मंत्री संजय सतेंद्र पाठक से सभी प्रभावित किसानो ने लिखित ज्ञापन देकर न्याय की गुहार लगाई गई। लेकिन आज भी २३५ किसान मुआवजे के अभाव में मायूस है।

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