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अनूपपुर में यातायात व्यवस्था बेपटरी, हाईवे चौकी फुनगा का बल हटने से सुरक्षा पर सवाल

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प्रमुख चौराहों पर यातायात जवान नदारद
, ऑटो-हाथठेलों से जाम, नो-एंट्री व्यवस्था पर गंभीर सवाल

अनूपपुर। शहर की यातायात व्यवस्था को सुचारु रखने की जिम्मेदारी यातायात पुलिस की है, लेकिन अनूपपुर शहर में जमीनी तस्वीर इसके उलट नजर आने के आरोप हैं। शहर के प्रमुख चौराहों पर आए दिन जाम, बेतरतीब खड़े ऑटो और हाथठेले तथा यातायात पुलिस की कथित गैरमौजूदगी को लेकर आमजन में नाराजगी बढ़ती जा रही है। यातायात थाना प्रभारी विनोद दुबे के कार्यकाल के दौरान यातायात व्यवस्था के पूरी तरह से बेपटरी हो चुकी हैं। शहर के सामतपुर तिराहा, बस स्टैंड, स्टेशन तिराहा, इंदिरा तिराहा और अमरकंटक तिराहा जैसे व्यस्ततम स्थानों पर यातायात पुलिस के जवान नियमित रूप से व्यवस्था संभालने में  नाकाम है।

फुनगा हाईवे चौकी बंद होने से सुरक्षा पर बड़ा सवाल

शहडोल-मनेन्द्रगढ़ हाईवे पर स्थित यातायात हाईवे चौकी फुनगा को सड़क सुरक्षा और दुर्घटनाओं की स्थिति में त्वरित सहायता एवं प्रशासनीक व्‍यवस्‍था में सुधार के उद्देश्य से पुलिस मुख्‍यालय भोपाल द्वारा संचालित किया गया था। लेकिन चौकी में तैनात बल को यातायात थाना से संबद्ध कर दिया गया, जिसके कारण हाईवे चौकी बिना कर्मचारियों के है, जबकि चौकी खोलने का कारण हाइवे में होने वाली दुर्घटनाओं पर तत्काल सहायता उपलब्ध कराना था। स्थानीय लोगों का कहना है कि चौकी संचालित रहने के दौरान दुर्घटना की स्थिति में पुलिस बल तत्काल मौके पर पहुंचकर सहायता उपलब्ध कराता था। अब बल हटने के बाद दुर्घटना की स्थिति में त्वरित प्रतिक्रिया को लेकर चिंता बढ़ गई है।

यातायात थाना का बढ़ा बल, फिर भी व्यवस्था जस की तस

बताया गया है कि पुलिस अधीक्षक द्वारा बल की कमी को देखते हुए यातायात हाईवे चौकी फुनगा में तैनात बल को भी यातायात थाना से संबद्ध किया गया। इसके बावजूद शहर की यातायात व्यवस्था में अपेक्षित सुधार दिखाई नहीं दे रहा है। सवाल यह भी उठ रहा है कि जब यातायात पुलिस के पास अतिरिक्त बल उपलब्ध कराया गया है, तो शहर के प्रमुख चौराहों पर यातायात नियंत्रण के लिए पर्याप्त जवान क्यों नहीं दिखाई देते?

नो-एंट्री के नियमों पर भी सवाल

अनूपपुर शहर में दुर्घटनाओं की रोकथाम के उद्देश्य से सुबह 6 बजे से रात 10 बजे तक भारी वाहनों के प्रवेश पर नो-एंट्री लागू होने की बात कही गई है। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि इस व्यवस्था का प्रभावी ढंग से पालन नहीं कराया जा रहा है और कुछ भारी वाहनों को कथित रूप से नियमों से छूट देकर शहर में प्रवेश कराया जाता है। जिससे पूरे शहर की व्‍यवस्‍था पूरी तरह से बेतरतीब हो चुकी है।

हाईवे पर ड्यूटी या वसूली?

यातायात पुलिस के कुछ जवानों को शहर की यातायात व्यवस्था के बजाय सरई रोड, पेंड्रा रोड और शहडोल-मनेन्द्रगढ़ मार्ग, जैतहरी-वेंकटनगर मार्ग पर लंबे समय तक तैनात देखे जाते है। सुबह करीब 8 बजे से देर रात तक दो टीमों के माध्यम से वाहनों की चेकिंग के नाम पर हाईवे में इनके द्वारा ऐसी कौन सी जांच की जाती है,  जो शहर की यातायात व्‍यवस्‍था को यातायात पुलिस द्वारा दरकिनार कर दिया जाता है। जानकारी के अनुसार यातायात थाना प्रभारी के कुछ चुनिंदा जवानों के माध्यम से यह पूरा तंत्र संचालित किया जा रहा है।

मंथली टोकन से चल रहा यातायात विभाग

सबसे गंभीर आरोप यह है कि शहर से गुजरने वाले भारी एवं मध्यम मालवाहक वाहन, यात्री बस, स्कूली बस और ऑटो से प्रतिमाह तक की मंथली वसूली के नाम पर टोकन काटे जाते है। इस टोकन से भारी ओव्‍हरलोड़ वाहन को एक माह तक छूट दी जाती है। जो वाहन चालक या मालिक टोकन नहीं लेता, उन्हें कार्रवाई के नाम पर परेशान किया जाता है।

कानून व्यवस्था के नाम पर निजी वाहन अधिग्रहण

जिले की यातायात व्‍यवस्‍था के नाम यातायात प्रभारी कानून व्यवस्था के नाम पर निजी वाहनों का अधिग्रहण कर उनका उपयोग हाईवे पर चेकिंग और वसूली संबंधी गतिविधियों में किया जाता है। यह जांच का विषय है कि निजी वाहनों के अधिग्रहण के लिए किस आदेश या वैधानिक प्रक्रिया का पालन किया जा रहा है और उनका वास्तविक उपयोग किस उद्देश्य से किया जा रहा है।

सबसे बड़ा सवाल—शहर संभालेगा कौन?

अनूपपुर शहर में यदि प्रमुख चौराहों पर नियमित यातायात ड्यूटी नहीं लग रही, नो-एंट्री प्रभावी नहीं है और यातायात बल का बड़ा हिस्सा हाईवे पर तैनात है, तो शहर की यातायात व्यवस्था की जिम्मेदारी कौन संभाल रहा है? आम नागरिकों के लिए यह सिर्फ जाम का सवाल नहीं है। यह सड़क सुरक्षा, दुर्घटना रोकथाम और पुलिस व्यवस्था पर सवाल है। आये दिन नो इंट्री के समय भारी वाहनों का प्रवेश, शहर की यातायात व्‍यवस्‍था की पोल, जाम  की स्थिति वाली वीडियो सोशल मीडिया में वॉयरल होती है, बावजूद इसके वरिष्‍ठ अधिकारियों द्वारा सब कुछ जानते हुए यातायात की अव्‍यवस्‍था के नाम पर चुप्‍पी साध अपनी जिम्‍मेदारी से पीछा छुड़ाने में लगे हुए है।

Jaitahari - 48 घंटे में हत्याकांड का खुलासा, पांच आरोपी गिरफ्तार

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जैतहरी हत्याकांड का खुलासा करने के बाद पुलिस की गिरफ्त में पांचों आरोपी
जैतहरी हत्याकांड का खुलासा करने के बाद पुलिस की गिरफ्त में पांचों आरोपी

पुरानी प्रेम संबंध की बात पर हुआ विवाद, बेल्ट से गला दबाकर युवक की हत्या

जंगल की झाड़ियों में फेंका शव, बाइक, कार, कपड़े और पर्स सहित अन्य सामग्री जब्त

इंट्रो- जैतहरी थाना क्षेत्र में 22 वर्षीय आदिवासी युवक गोवर्धन कोल की हत्या के मामले का पुलिस ने 48 घंटे के भीतर खुलासा करते हुए पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस के अनुसार पुरानी प्रेम संबंध की बात को लेकर हुए विवाद के बाद युवक की बेल्ट से गला दबाकर हत्या की गई और साक्ष्य छिपाने के लिए शव को जंगल में फेंक दिया गया। पुलिस ने आरोपियों की निशानदेही पर कथित हत्या में प्रयुक्त सामान, बाइक, ईको कार, कपड़े और मृतक का पर्स बरामद किया है।

अनूपपुर। जैतहरी थाना क्षेत्र में 22 वर्षीय युवक की हत्या के मामले में पुलिस ने 48 घंटे के भीतर कार्रवाई करते हुए पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस के अनुसार मृतक के चचेरे भाई और मुख्य आरोपी की चचेरी बहन के बीच पूर्व में रहे प्रेम संबंध को लेकर पुरानी रंजिश थी। इसी बात को लेकर 23 सितंबर की रात शराब पीने के दौरान विवाद हुआ, जिसके बाद आरोपी ने मृतक और उसके दो दोस्तों के साथ मारपीट की। मृतक के दोनों दोस्त मौके से भाग निकले, जबकि आरोपी ने पीछा कर उसे पकड़ लिया और बेल्ट से गला दबाकर उसकी हत्या कर दी। बाद में शव को ईको कार से जंगल में ले जाकर फेंक दिया गया।

गणेश विसर्जन के लिए निकला था युवक

पुलिस के मुताबिक 24 सितंबर को प्रेमलाल कोल निवासी सिवनी डोंगरी टोला, थाना जैतहरी ने अपने 22 वर्षीय पुत्र गोवर्धन कोल के लापता होने की रिपोर्ट दर्ज कराई थी। परिजनों के अनुसार गोवर्धन 23 सितंबर की शाम गणेश विसर्जन के लिए मोटरसाइकिल से घर से निकला था। रात करीब 10 बजे परिजनों को जानकारी मिली कि गोवर्धन के साथ कुछ लोग मारपीट कर रहे हैं। इसके बाद परिजनों ने उसकी तलाश शुरू की। अगले दिन मंडल के बगीचे के पास गोवर्धन की मोटरसाइकिल का टूटा हुआ क्लच केबल और दोनों पैरों की चप्पलें मिलीं। बाइक घटनास्थल से करीब एक किलोमीटर दूर मिली। संदिग्ध परिस्थितियों को देखते हुए पुलिस ने तलाश अभियान तेज किया।

जंगल की झाड़ियों में मिला शव

तलाश के दौरान पुलिस को गोवर्धन का शव बदनहाई डोंगरी सिवनी के जंगल में झाड़ियों के बीच मिला। घटनास्थल का एफएसएल अधिकारियों और डॉग स्क्वॉड की मौजूदगी में निरीक्षण कराया गया। पुलिस ने घटनास्थल की वीडियोग्राफी कराई और नक्शा मौका तैयार किया। शव का पंचनामा बनाकर जैतहरी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में पोस्टमार्टम कराया गया। जांच के दौरान पुलिस ने हत्या और साक्ष्य छिपाने से संबंधित धाराएं बढ़ाईं। मृतक के अनुसूचित जनजाति वर्ग से होने के आधार पर प्रकरण में एससी-एसटी एक्ट की संबंधित धाराएं भी जोड़ी गईं।

शराब पीने के दौरान सामने आई पुरानी बात

पुलिस के अनुसार जांच और पूछताछ में सामने आया कि मृतक के चचेरे भाई तथा मुख्य आरोपी की चचेरी बहन के बीच पूर्व में प्रेम संबंध था। इसी बात को लेकर आरोपी के मन में रंजिश थी। 23 सितंबर की रात मृतक अपने दो दोस्तों और आरोपी के साथ बैठकर शराब पी रहा था। इसी दौरान पुरानी बात को लेकर चर्चा शुरू हुई और विवाद बढ़ गया। आरोप है कि विवाद के बाद आरोपी ने बेल्ट से तीनों युवकों के साथ मारपीट की। इस दौरान मृतक के दोनों दोस्त मौके से भाग निकले। गोवर्धन भी मोटरसाइकिल से वहां से निकलने लगा, लेकिन आरोपी ने उसका पीछा कर मंडल के बगीचे के पास उसे पकड़ लिया। पुलिस के मुताबिक आरोपी ने बेल्ट से उसका गला दबा दिया, जिससे उसकी मौत हो गई। पुलिस के अनुसार वारदात के बाद आरोपी ने अपने पिता को फोन कर घटना की जानकारी दी। इसके बाद आरोपी का पिता ईको कार लेकर मौके पर पहुंचा। शव को कार में रखने के बाद उसे साक्ष्य छिपाने के उद्देश्य से जंगल में ले जाकर फेंक दिया गया।

पांच आरोपी गिरफ्तार, सामग्री जब्त

मामले की जांच के दौरान पुलिस ने सूरज राठौर, राहुल सिंह राठौर, तेजराज राठौर, दिनेश गोड और राहुल राठौर, सभी निवासी सिवनी को हिरासत में लेकर पूछताछ की। पुलिस के अनुसार पूछताछ में आरोपियों ने वारदात में शामिल होना स्वीकार किया। आरोपियों की निशानदेही पर पुलिस ने कथित तौर पर घटना में प्रयुक्त आला-जरब, घटना के समय पहने गए कपड़े, मोटरसाइकिल, ईको कार और मृतक का पर्स सहित अन्य सामग्री जब्त की है। सभी आरोपियों को विधिवत गिरफ्तार कर न्यायिक रिमांड के लिए न्यायालय अनूपपुर में पेश किया गया। पुलिस के अनुसार मामले की विवेचना जारी है। कार्रवाई में थाना प्रभारी निरीक्षक गोकुलानंद पाण्डेय, चौकी प्रभारी उनि प्रवीण साहू, उपनिरीक्षक अमरलाल यादव, सुरेश अहिरवार, जेपीएच तिर्की, सहायक उपनिरीक्षक मणिराज सिंह, सुरेश कुमार कोरी, जयसिंह, श्रीश्याम शुक्ला सहित पुलिस बल की महत्वपूर्ण भूमिका रही।

अनूपपुर में अवैध कारोबार पर किसकी नजर? गांजा-पशु तस्करी ने बढ़ाई चिंता

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छोटी कार्रवाई से आगे कब बढ़ेगा अभियान
?
बड़े नेटवर्क पर शिकंजा कसने की जरूरत

अनूपपुर। जिले में आपराधिक और अवैध गतिविधियों पर पूरी तरह अंकुश लगता नजर नहीं आ रहा है। पशु क्रूरता, गांजा तस्करी, नशीली दवाओं की खेप और जुआ फड़ों के संचालन जैसी गतिविधियां पुलिस के लिए चुनौती बनी हुई हैं। स्थानीय स्तर पर आरोप लगाए जा रहे हैं कि कुछ थाना क्षेत्रों में छोटी-मोटी कार्रवाई तक सीमित रहकर महज कागजी खानापूर्ति की जा रही है, जबकि बड़े स्तर पर संचालित कथित अवैध कारोबार के खिलाफ अपेक्षित प्रभावी कार्रवाई नजर नहीं आ रही है। सबसे अधिक सवाल गांजा तस्करी के नेटवर्क और पुलिस की निगरानी व्यवस्था को लेकर उठ रहे हैं। ओडिशा से छत्तीसगढ़ के रास्ते गांजे की खेप अनूपपुर जिले में पहुंचती है और यहां से शहडोल, सतना, रीवा, जबलपुर, सीधी, सिंगरौली सहित अन्य जिलों तक सप्लाई किए जाने की बात कही जा रही है।

वर्ष 2026 में ना मात्र की कार्यवाही

उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2023 में पुलिस ने 1,716.191 किलो गांजा जब्त किया था। वहीं वर्ष 2024 में 136.294 किलो गांजा जब्त किए जाने की जानकारी सामने आई है। वर्ष 2022 में भी करीब एक टन गांजा जब्त किए जाने का दावा किया गया था। इन आंकड़ों के बीच अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि वर्ष 2026 में ना मात्र की कार्यवाही साथ ही 19 मई के बाद जिले में गांजा तस्करी के खिलाफ कितनी कार्रवाई हुई? कितनी मात्रा में गांजा जब्त किया गया, कितने आरोपी गिरफ्तार हुए और कितने वाहनों को जब्त किया गया। इन तमाम बिंदुओं पर पुलिस की ओर से विस्तृत जानकारी सामने आना बाकी है।

कार्यवाही करने बचते पुलिस अधिकारी

बताया जाता है कि गांजे की खेप जिले के जैतहरी, भालूमाड़ा, कोतमा, रामनगर, राजेन्‍द्रग्राम और करनपठार सहित अन्य पुलिस चौकियों से होकर आगे निकलने की चर्चा है। यदि इन मार्गों का इस्तेमाल तस्करी के लिए किया जा रहा है तो पुलिस की जांच और निगरानी व्यवस्था पर सवाल उठना स्वाभाविक है। सवाल यह भी है कि पुलिस के पास तस्करों के खिलाफ कार्रवाई के लिए पर्याप्त सूचना तंत्र नहीं है या फिर उपलब्ध सूचनाओं पर अपेक्षित गंभीरता से कार्रवाई नहीं हो रही है। तस्करी के नेटवर्क को केवल वाहन और माल की जब्ती तक सीमित रखने के बजाय इसके पीछे सक्रिय लोगों और नेटवर्क तक पहुंचने में असहज क्‍यो महसूस हो रही है।

ओडिशा से अनूपपुर फिर दूसरे जिलो तक सप्‍लाई

जिले में वर्ष 2022 से अब तक हुई हर कार्यवाही में आरोपियों द्वारा ओडिशा से छत्तीसगढ़ के रास्ते गांजा अनूपपुर पहुंचाए जाने की बात सामने आती रही है। इसके बाद कथित तौर पर इसे प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों में भेजा जाता है। यदि यह नेटवर्क लंबे समय से सक्रिय है तो तस्करी के संभावित मार्गों, वाहनों, आरोपियों और आर्थिक नेटवर्क की पहचान कर कार्रवाई करना पुलिस के सामने बड़ी चुनौती क्‍यो बनी हुई है। ऐसे में 19 मई के बाद गांजा तस्करी के खिलाफ हुई कार्रवाई का विस्तृत ब्यौरा सार्वजनिक करना पुलिस के लिए स्थिति स्पष्ट करने का महत्वपूर्ण कदम हो सकता है।

पशु तस्‍करी पर लगा प्रश्‍नचिन्‍ह

जिले में पशु क्रूरता और अवैध पशु परिवहन के खिलाफ पुलिस कार्रवाई को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। जैतहरी थाना क्षेत्र में हाल ही में पशु तस्करों के खिलाफ हुई कार्रवाई के बाद कोतमा, रामनगर और फुनगा चौकी क्षेत्र में भी इसी तरह की सख्ती की उम्मीद जताई गई थी। स्थानीय स्तर पर आरोप लगाए जा रहे हैं कि इन क्षेत्रों में कथित पशु तस्करी के बावजूद अपेक्षित कार्रवाई नहीं हो रही है। कोतमा और रामनगर क्षेत्र पशु तस्करी के प्रमुख केंद्रों में शामिल हैं, फिर भी कार्यवाही सिफर है।

जैतहरी पुलिस की कार्यवाही केबाद बढ़ी थी उम्‍मीद

जैतहरी थाना क्षेत्र में पशु तस्करों के खिलाफ हुई कार्रवाई को प्रभावी कार्रवाई के रूप में देखा गया। इसके बाद लोगों को उम्मीद थी कि कोतमा, रामनगर सहित अन्य थाना क्षेत्रों में भी अवैध पशु परिवहन और तस्करी के खिलाफ व्यापक अभियान चलाया जाएगा। हालांकि स्थानीय स्तर पर कार्रवाई की कमी को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं। कुछ लोगों का आरोप है कि कार्रवाई में असमानता के कारण तस्करों के हौसले बढ़े हुए हैं। कार्रवाई के दौरान पत्रकारों को निशाना बनाए जाने और पुलिस पर दबाव बनाए जाने की चर्चाएं भी सामने आती रही हैं, जिनकी पुष्टि संबंधित अधिकारियों से किया जाना आवश्यक है।

बड़े नेटवर्क पर कार्यवाही की जरूरत

जिले में गांजा तस्करी, पशु तस्करी, नशीली दवाओं और जुआ जैसी अवैध गतिविधियों को लेकर लगातार सवाल उठ रहे हैं। ऐसे में पुलिस के सामने चुनौती केवल मामले दर्ज करने और छोटी जब्तियों तक सीमित रहने की नहीं, बल्कि अवैध कारोबार के पीछे सक्रिय बड़े नेटवर्क तक पहुंचने की है। वरिष्ठ पुलिस अधिकारी थाना स्तर पर होने वाली कार्रवाई की नियमित समीक्षा ना करना और जहां सूचना उपलब्ध हो, वहां निष्पक्ष एवं प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित ना करना भी कई सवाल खड़े कर रहे है।


Anuppur: रेलवे रैक प्वाइंट तक भेजे जा रहे चावल में क्षमता से अधिक लोडिंग, चार वाहनों पर जुर्माना

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एसपी की ओवरलोड परिवहन पर सख्ती, 42 ट्रकों में ओवरलोडिंग, कार्रवाई सिर्फ चार तक सीमित

अनूपपुर। मध्य प्रदेश स्टेट सिविल सप्लाईज कॉर्पोरेशन के हजारों क्विंटल चावल के परिवहन में ओवरलोडिंग का मामला सामने आने के बाद अनूपपुर पुलिस ने बड़ी कार्रवाई की है। पुलिस अधीक्षक विक्रांत मुराव के निर्देशन में कोतवाली पुलिस ने दो ट्रको पर कार्यवाही की तो वहीं यातायात पुलिस ने ओवरलोड वाहनों के खिलाफ दो ट्रको पर 41 हजार का जुर्माना लगाया गया है। जानकारी के अनुसार अनूपपुर जिले से मुरैना जिले के लिए भेजे जा रहे चावल को रेलवे रैक प्वाइंट तक पहुंचाने के लिए लगाए गए कई ट्रकों में निर्धारित क्षमता से अधिक माल लादा जा रहा था। शिकायतों और निगरानी के दौरान ओवरलोड परिवहन की पुष्टि होने पर पुलिस ने कार्रवाई करते हुए चार ट्रकों के खिलाफ चालानी कार्रवाई कर जुर्माना लगाया। जांच और चेकिंग के दौरान कई ट्रकों के चालक अपने वाहन मौके पर ही छोड़कर फरार हो गए। जिससे ट्रको पर कार्यवाही ना हो सके। रेलवे रैक प्वाइंट तक चावल पहुंचाने के लिए बड़ी संख्या में वाहनों का उपयोग किया जा रहा है। ऐसे में ओवरलोडिंग न केवल सड़क सुरक्षा के लिए खतरा बन रही है, बल्कि परिवहन नियमों का भी खुला उल्लंघन है।

कोतवाली पुलिस ने दो ट्रको पर की कार्यवाही

पुलिस अधीक्षक विक्रांत मुराब के निर्देशन में कोतवाली पुलिस ने कार्रवाई करते हुए क्षमता से अधिक लदे दो ट्रकों को पकड़ा है। कार्रवाई कोतवाली थाना प्रभारी अरविंद जैन के नेतृत्व में 17 जून को की गई। जांच के दौरान ट्रक क्रमांक एमपी 20 एचबी 5660 एवं एचपी 38 जे 4533 में निर्धारित क्षमता से अधिक चावल लोड पाया गया। ओवरलोडिंग की पुष्टि होने पर दोनों वाहनों को थाना परिसर लाया गया और वैधानिक कार्रवाई की गई। मामले में ट्रक चालक राजेश यादव पिता रामसुरत यादव 40 वर्ष निवासी चंदिया तथा दीपेश यादव पिता सुखसेन प्रसाद यादव 30 वर्ष निवासी ग्राम पोड़ी कला थाना ब्यौहारी के विरुद्ध धारा 113/194(1) के तहत ओवरलोडिंग तथा परमिट की शर्तों के उल्लंघन पाए जाने पर धारा 66/192(ए) मोटर वाहन अधिनियम के अंतर्गत कार्रवाई की गई है।

यातायात की कार्यवाही बना दिखावा

17 जून को पुलिस अधीक्षक ने यातायात और कोतवाली पुलिस को चावल से लदे ओव्‍हर लोड़ ट्रको पर कार्यवाही के निर्देश दिये। जहां कोतवाली पुलिस ने तत्‍काल ओव्‍हर लोड़ दो ट्रको पर कार्यवाही की गई। लेकिन यातायात पुलिस इस कार्यवाही बचती देखी गई। वहीं कोतवाली पुलिस की कार्यवाही के दूसरे दिन यातायात पुलिस मौके पर पहुंचकर 5 ट्रको की जांच की गई,  जिसमें तीन ट्रक अंडरलोड पाई गई। वहीं दो ट्रक जिनमें एमपी 09 एएल 9933 पर 20 हजार एवं एमपी 21 एच 6333 पर 21 हजार का जुर्माना लगाया गया। जबकि 17 जून को जिले के बीओटी गोदाम दारसागर, रामजानकी वेयर हाउस, श्री शिवाय वेयर हाउस एवं अन्‍नपूर्णा वेयर हाउस से 17 जून चावल से लदे लगभग 42 ट्रक ओव्‍हर लोड़ निकले थे, जिनमें दिन रात सड़को पर खड़े रहने वाली यातायात पुलिस ने सिर्फ 2 ट्रक ही ओव्‍हर लोड़ मिले।

यातायात को 42 ट्रको में सिर्फ 2 ट्रक ओव्‍हर लोड़ मिले

रेलवे रैक प्‍वाइंट के लिये जिले के चार गोदामों से 17 जून को निकले 42 ओव्‍हर लोड़ ट्रको में यातायात को सिर्फ 2 ट्रक ओव्‍हर लोड़ मिले। जबकि यातायात पुलिस इन दिनों दिन रात दो दो प्‍वांइट  बनाकर हाइवे में खड़े होकर यातायात नियमों के उल्‍लंघनन करने वाले वाहनों पर कार्यवाही की जा रही है। सूत्रो से मिली जानकारी के अनुसार बीओटी गोदाम दारसागर से चावल के 20 ट्रक, रामजानकी वेयर हाउस से 12, श्री शिवाय वेयर हाउस से 3 एवं अन्‍नपूर्णा वेयर हाउस से 7 ओव्‍हर लोड़ ट्रक निकले थे। एसपी के कड़े रूख अपनाने के बाद कई ओव्‍हर लोड़ ट्रक तुलसी वेयर हाउस मेडि़यारास में कार्यवाही होने से बचने के लिये खड़ी हो गई। इतना ही नही गायत्री ट्रांसपोर्टर द्वारा एक एक कर ट्रको को वेयर हाउस से बाहर निकालते हुये रेलवे रैक प्‍वांइट पहुंचाई जा रही है। वहीं 18 जून को लोड़ हुये सभी ट्रक अंडर लोड़ कर दिये गये है।

एसपी की कार्यवाही देख अंडर लोडिंग हुआ चालू

पूरे मामले में पुलिस अधीक्षक के सख्‍त निर्देशन और कड़ी निगरानी के बाद 18 जून को चारो वेयर हाउस से चावल अंडर लोड़ दिया जाने लगा। पुलिस अधीक्षक ने बताया कि सड़क दुर्घटनाओं को कम करने के लिये यातायात नियमों के अनुरूप से वाहनों में क्षमता से अधिक माल परिवहन करने वालों के खिलाफ सख्‍त कार्यवाही की जायेगी। वहीं जिला स्‍तरीय सड़क सुरक्षा समिति की बैठक 17 जून को कलेक्‍टर हर्षल पंचोली की उपस्थिति में में भी ओवरलोड वाहनों के बढ़ते संचालन को गंभीरता से लेते ऐसे वाहनों पर विशेष निगरानी रखने के निर्देश दिए गये थे। उन्होंने कहा कि ओवरलोडिंग न केवल सड़क सुरक्षा के लिए खतरा है।

अनूपपुर रेलवे रैक प्वाइंट पर करोड़ों के चावल परिवहन में बड़ा खेल?

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5 से 10 टन तक अतिरिक्त भार लादने के आरोप, निगम के अनुबंध की शर्तों पर उठे सवाल

खुले आसमान के नीचे हजारों बोरी चावल, बारिश में खराब होने का खतरा

अनूपपुर। मध्य प्रदेश स्टेट सिविल सप्लाईज कॉर्पोरेशन के लिए किए जा रहे चावल परिवहन कार्य में कथित रूप से बड़े पैमाने पर अनियमितताओं का मामला सामने आया है। अनूपपुर रेलवे रैक प्वाइंट से मुरैना जिले के लिए भेजे जा रहे हजारों क्विंटल चावल के परिवहन में वाहनों की निर्धारित क्षमता से अधिक भार लादने, खाद्यान्न सुरक्षा मानकों की अनदेखी करने तथा अनुबंध की शर्तों का उल्लंघन किए जाने के आरोप लगे हैं। यदि आरोपों की निष्पक्ष जांच होती है और तथ्य सही पाए जाते हैं तो यह मामला केवल परिवहन नियमों के उल्लंघन तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि सार्वजनिक वितरण प्रणाली से जुड़े खाद्यान्न की सुरक्षा और सरकारी संसाधनों के संरक्षण पर भी गंभीर प्रश्न खड़े करेगा।

26 हजार क्विंटल चावल परिवहन में कथित गड़बड़ी

जानकारी के अनुसार अनूपपुर जिले के विभिन्न बीओटी गोदाम दारसागर, अन्नपूर्णा वेयरहाउस कोतमा, रामजानकी वेयरहाउस वेंकटनगर तथा श्री शिवाय वेयरहाउस से लगभग 26 हजार क्विंटल चावल ट्रकों के माध्यम से अनूपपुर रेलवे रैक प्वाइंट पहुंचाया जा रहा है। यह परिवहन कार्य निगम के परिवहनकर्ता गायत्री ट्रांसपोर्ट कटनी द्वारा किया जा रहा है। आरोप है कि परिवहन कार्य में लगाए गए अधिकांश ट्रकों में उनकी स्वीकृत वहन क्षमता से 5 से 10 टन तक अतिरिक्त भार लादा जा रहा है। यदि यह आरोप सही हैं तो यह न केवल मोटर वाहन कानूनों का उल्लंघन है बल्कि निगम और परिवहनकर्ता के बीच हुए अनुबंध की शर्तों के भी प्रतिकूल है।

अनुबंध की शर्तों की अनदेखी?

सूत्रों के अनुसार खाद्यान्न परिवहन से संबंधित अनुबंध में स्पष्ट प्रावधान है कि परिवहन में लगाए जाने वाले वाहनों पर निर्धारित क्षमता से अधिक भार नहीं लादा जाएगा। ओवरलोडिंग की स्थिति में दुर्घटना, माल क्षति तथा राजस्व हानि की जिम्मेदारी भी तय की जा सकती है। इसके बावजूद कथित रूप से नियमों को ताक पर रखकर वाहनों में अतिरिक्त भार भरकर उन्हें सड़कों पर दौड़ाया जा रहा है। सवाल यह उठ रहा है कि यदि वाहनों का नियमित सत्यापन और वजन परीक्षण किया जा रहा है तो फिर इतनी बड़ी मात्रा में ओवरलोडिंग कैसे संभव हो रही है?

मोटर वाहन अधिनियम के तहत दंडनीय अपराध

मोटर वाहन अधिनियम, 1988 तथा उससे संबंधित नियमों के तहत किसी भी मालवाहक वाहन में निर्धारित क्षमता से अधिक भार लेकर चलना दंडनीय अपराध है। ओवरलोडिंग पाए जाने पर वाहन स्वामी, परिवहनकर्ता और चालक के विरुद्ध जुर्माना, वाहन जब्ती तथा अन्य वैधानिक कार्रवाई की जा सकती है। वहीं ओवरलोड वाहनों के कारण सड़क दुर्घटनाओं की संभावना कई गुना बढ़ जाती है। ब्रेकिंग सिस्टम और वाहन नियंत्रण प्रभावित होता है, पुल-पुलियों एवं सड़कों को भारी नुकसान पहुंचने के साथ सार्वजनिक सुरक्षा खतरे में पड़ती है।

रेलवे रैक प्वाइंट पर खाद्यान्न सुरक्षा भी सवालों के घेरे में

मामले का दूसरा गंभीर पहलू खाद्यान्न सुरक्षा से जुड़ा हुआ है। आरोप है कि अनूपपुर रेलवे रैक प्वाइंट पर चावल की बोरियों को बिना पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था के खुले स्थान पर उतारा जा रहा है। स्थानीय सूत्रों के अनुसार रैक प्वाइंट पर एडवांस लोडिंग के लिए पर्याप्त प्लेटफॉर्म या संरक्षित भंडारण व्यवस्था उपलब्ध नहीं है। इसके बावजूद हजारों बोरी चावल खुले आसमान के नीचे रखे जाने की बात सामने आई है। वर्तमान समय में मानसून की सक्रियता और लगातार बदलते मौसम को देखते हुए खाद्यान्न के भीगने, खराब होने तथा गुणवत्ता प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है। जहां बाद में चावल की गुणवत्‍ता प्रभावित होने की प्रबल संभावना है।

सार्वजनिक वितरण प्रणाली पर पड़ सकता है असर

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि खाद्यान्न परिवहन और भंडारण के दौरान निर्धारित सुरक्षा मानकों का पालन नहीं किया जाता तो इसका सीधा असर सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) पर पड़ सकता है। बारिश या अनुचित रखरखाव के कारण चावल की गुणवत्ता प्रभावित होने पर सरकारी खजाने को नुकसान होने के साथ-साथ उपभोक्ताओं तक निम्न गुणवत्ता का खाद्यान्न पहुंचने का खतरा भी बढ़ जाता है। मामले में यदि वाहनों में क्षमता से अधिक भार लादा जा रहा था तो परिवहन कार्य की निगरानी करने वाले, वाहनों का वजन परीक्षण करने वाले,  निगम के जिम्मेदार अधिकारी, खाद्यान्न सुरक्षा के लिए क्या वैकल्पिक व्यवस्था की जिम्‍मेदारी, खुले में रखी गई चावल की बोरियों की जिम्मेदारी किसकी होगी?

स्थानीय लोगों ने उठाई निष्पक्ष जांच की मांग

मामले को लेकर स्थानीय नागरिकों ने गंभीर चिंता व्यक्त की है। उनका कहना है कि यदि सरकारी खाद्यान्न के परिवहन में नियमों की अनदेखी हो रही है तो इसकी उच्चस्तरीय जांच कराई जानी चाहिए। लोगों ने मांग की है कि परिवहन कार्य में लगे वाहनों का रिकॉर्ड, वजन पर्चियां, परिवहन अनुबंध की शर्तें तथा रेलवे रैक प्वाइंट पर की गई व्यवस्थाओं की जांच की जाए। साथ ही दोषी पाए जाने वाले परिवहनकर्ता एवं संबंधित अधिकारियों के विरुद्ध कठोर वैधानिक कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।

इनका कहना है

मुझे इस संबंध में कोई  जानकारी नही है, अगर परिहवन कार्य में लगे ट्रक में ओव्‍हर लोडिंग की जा रही है, तो इस संबंध में मै ठेकेदार से जानकारी लेती हॅू।

सीमा सिन्‍हा, प्रभारी प्रबंधक

नागरिक आपूर्ति निगम अनूपपुर

 

इनका कहना है

जानकारी मिली है, मेरे द्वारा कोतवाली पुलिस एवं यातायात विभाग को कार्यवाही के निर्देश दिये गये है।

विक्रांत मुराब, पुलिस अधीक्षक अनूपपुर

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