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अनूपपुर में अवैध कारोबार पर किसकी नजर? गांजा-पशु तस्करी ने बढ़ाई चिंता

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छोटी कार्रवाई से आगे कब बढ़ेगा अभियान
?
बड़े नेटवर्क पर शिकंजा कसने की जरूरत

अनूपपुर जिले में आपराधिक और अवैध गतिविधियों पर पूरी तरह अंकुश लगता नजर नहीं आ रहा है। पशु क्रूरता, गांजा तस्करी, नशीली दवाओं की खेप और जुआ फड़ों के संचालन जैसी गतिविधियां पुलिस के लिए चुनौती बनी हुई हैं। स्थानीय स्तर पर आरोप लगाए जा रहे हैं कि कुछ थाना क्षेत्रों में छोटी-मोटी कार्रवाई तक सीमित रहकर महज कागजी खानापूर्ति की जा रही है, जबकि बड़े स्तर पर संचालित कथित अवैध कारोबार के खिलाफ अपेक्षित प्रभावी कार्रवाई नजर नहीं आ रही है। सबसे अधिक सवाल गांजा तस्करी के नेटवर्क और पुलिस की निगरानी व्यवस्था को लेकर उठ रहे हैं। ओडिशा से छत्तीसगढ़ के रास्ते गांजे की खेप अनूपपुर जिले में पहुंचती है और यहां से शहडोल, सतना, रीवा, जबलपुर, सीधी, सिंगरौली सहित अन्य जिलों तक सप्लाई किए जाने की बात कही जा रही है।

वर्ष 2026 में ना मात्र की कार्यवाही

उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2023 में पुलिस ने 1,716.191 किलो गांजा जब्त किया था। वहीं वर्ष 2024 में 136.294 किलो गांजा जब्त किए जाने की जानकारी सामने आई है। वर्ष 2022 में भी करीब एक टन गांजा जब्त किए जाने का दावा किया गया था। इन आंकड़ों के बीच अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि वर्ष 2026 में ना मात्र की कार्यवाही साथ ही 19 मई के बाद जिले में गांजा तस्करी के खिलाफ कितनी कार्रवाई हुई? कितनी मात्रा में गांजा जब्त किया गया, कितने आरोपी गिरफ्तार हुए और कितने वाहनों को जब्त किया गयाइन तमाम बिंदुओं पर पुलिस की ओर से विस्तृत जानकारी सामने आना बाकी है।

कार्यवाही करने बचते पुलिस अधिकारी

बताया जाता है कि गांजे की खेप जिले के जैतहरी, भालूमाड़ा, कोतमा, रामनगर, राजेन्‍द्रग्राम और करनपठार सहित अन्य पुलिस चौकियों से होकर आगे निकलने की चर्चा है। यदि इन मार्गों का इस्तेमाल तस्करी के लिए किया जा रहा है तो पुलिस की जांच और निगरानी व्यवस्था पर सवाल उठना स्वाभाविक है। सवाल यह भी है कि पुलिस के पास तस्करों के खिलाफ कार्रवाई के लिए पर्याप्त सूचना तंत्र नहीं है या फिर उपलब्ध सूचनाओं पर अपेक्षित गंभीरता से कार्रवाई नहीं हो रही है। तस्करी के नेटवर्क को केवल वाहन और माल की जब्ती तक सीमित रखने के बजाय इसके पीछे सक्रिय लोगों और नेटवर्क तक पहुंचने में असहज क्‍यो महसूस हो रही है।

ओडिशा से अनूपपुर फिर दूसरे जिलो तक सप्‍लाई

जिले में वर्ष 2022 से अब तक हुई हर कार्यवाही में आरोपियों द्वारा ओडिशा से छत्तीसगढ़ के रास्ते गांजा अनूपपुर पहुंचाए जाने की बात सामने आती रही है। इसके बाद कथित तौर पर इसे प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों में भेजा जाता है। यदि यह नेटवर्क लंबे समय से सक्रिय है तो तस्करी के संभावित मार्गों, वाहनों, आरोपियों और आर्थिक नेटवर्क की पहचान कर कार्रवाई करना पुलिस के सामने बड़ी चुनौती क्‍यो बनी हुई है। ऐसे में 19 मई के बाद गांजा तस्करी के खिलाफ हुई कार्रवाई का विस्तृत ब्यौरा सार्वजनिक करना पुलिस के लिए स्थिति स्पष्ट करने का महत्वपूर्ण कदम हो सकता है।

पशु तस्‍करी पर लगा प्रश्‍नचिन्‍ह

जिले में पशु क्रूरता और अवैध पशु परिवहन के खिलाफ पुलिस कार्रवाई को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। जैतहरी थाना क्षेत्र में हाल ही में पशु तस्करों के खिलाफ हुई कार्रवाई के बाद कोतमा, रामनगर और फुनगा चौकी क्षेत्र में भी इसी तरह की सख्ती की उम्मीद जताई गई थी। स्थानीय स्तर पर आरोप लगाए जा रहे हैं कि इन क्षेत्रों में कथित पशु तस्करी के बावजूद अपेक्षित कार्रवाई नहीं हो रही है। कोतमा और रामनगर क्षेत्र पशु तस्करी के प्रमुख केंद्रों में शामिल हैं, फिर भी कार्यवाही सिफर है।

जैतहरी पुलिस की कार्यवाही केबाद बढ़ी थी उम्‍मीद

जैतहरी थाना क्षेत्र में पशु तस्करों के खिलाफ हुई कार्रवाई को प्रभावी कार्रवाई के रूप में देखा गया। इसके बाद लोगों को उम्मीद थी कि कोतमा, रामनगर सहित अन्य थाना क्षेत्रों में भी अवैध पशु परिवहन और तस्करी के खिलाफ व्यापक अभियान चलाया जाएगा। हालांकि स्थानीय स्तर पर कार्रवाई की कमी को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं। कुछ लोगों का आरोप है कि कार्रवाई में असमानता के कारण तस्करों के हौसले बढ़े हुए हैं। कार्रवाई के दौरान पत्रकारों को निशाना बनाए जाने और पुलिस पर दबाव बनाए जाने की चर्चाएं भी सामने आती रही हैं, जिनकी पुष्टि संबंधित अधिकारियों से किया जाना आवश्यक है।

बड़े नेटवर्क पर कार्यवाही की जरूरत

जिले में गांजा तस्करी, पशु तस्करी, नशीली दवाओं और जुआ जैसी अवैध गतिविधियों को लेकर लगातार सवाल उठ रहे हैं। ऐसे में पुलिस के सामने चुनौती केवल मामले दर्ज करने और छोटी जब्तियों तक सीमित रहने की नहीं, बल्कि अवैध कारोबार के पीछे सक्रिय बड़े नेटवर्क तक पहुंचने की है। वरिष्ठ पुलिस अधिकारी थाना स्तर पर होने वाली कार्रवाई की नियमित समीक्षा ना करना और जहां सूचना उपलब्ध हो, वहां निष्पक्ष एवं प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित ना करना भी कई सवाल खड़े कर रहे है।


Anuppur: रेलवे रैक प्वाइंट तक भेजे जा रहे चावल में क्षमता से अधिक लोडिंग, चार वाहनों पर जुर्माना

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एसपी की ओवरलोड परिवहन पर सख्ती, 42 ट्रकों में ओवरलोडिंग, कार्रवाई सिर्फ चार तक सीमित

अनूपपुरमध्य प्रदेश स्टेट सिविल सप्लाईज कॉर्पोरेशन के हजारों क्विंटल चावल के परिवहन में ओवरलोडिंग का मामला सामने आने के बाद अनूपपुर पुलिस ने बड़ी कार्रवाई की है। पुलिस अधीक्षक विक्रांत मुराव के निर्देशन में कोतवाली पुलिस ने दो ट्रको पर कार्यवाही की तो वहीं यातायात पुलिस ने ओवरलोड वाहनों के खिलाफ दो ट्रको पर 41 हजार का जुर्माना लगाया गया है। जानकारी के अनुसार अनूपपुर जिले से मुरैना जिले के लिए भेजे जा रहे चावल को रेलवे रैक प्वाइंट तक पहुंचाने के लिए लगाए गए कई ट्रकों में निर्धारित क्षमता से अधिक माल लादा जा रहा था। शिकायतों और निगरानी के दौरान ओवरलोड परिवहन की पुष्टि होने पर पुलिस ने कार्रवाई करते हुए चार ट्रकों के खिलाफ चालानी कार्रवाई कर जुर्माना लगाया। जांच और चेकिंग के दौरान कई ट्रकों के चालक अपने वाहन मौके पर ही छोड़कर फरार हो गए। जिससे ट्रको पर कार्यवाही ना हो सके। रेलवे रैक प्वाइंट तक चावल पहुंचाने के लिए बड़ी संख्या में वाहनों का उपयोग किया जा रहा है। ऐसे में ओवरलोडिंग न केवल सड़क सुरक्षा के लिए खतरा बन रही है, बल्कि परिवहन नियमों का भी खुला उल्लंघन है।

कोतवाली पुलिस ने दो ट्रको पर की कार्यवाही

पुलिस अधीक्षक विक्रांत मुराब के निर्देशन में कोतवाली पुलिस ने कार्रवाई करते हुए क्षमता से अधिक लदे दो ट्रकों को पकड़ा है। कार्रवाई कोतवाली थाना प्रभारी अरविंद जैन के नेतृत्व में 17 जून को की गई। जांच के दौरान ट्रक क्रमांक एमपी 20 एचबी 5660 एवं एचपी 38 जे 4533 में निर्धारित क्षमता से अधिक चावल लोड पाया गया। ओवरलोडिंग की पुष्टि होने पर दोनों वाहनों को थाना परिसर लाया गया और वैधानिक कार्रवाई की गई। मामले में ट्रक चालक राजेश यादव पिता रामसुरत यादव 40 वर्ष निवासी चंदिया तथा दीपेश यादव पिता सुखसेन प्रसाद यादव 30 वर्ष निवासी ग्राम पोड़ी कला थाना ब्यौहारी के विरुद्ध धारा 113/194(1) के तहत ओवरलोडिंग तथा परमिट की शर्तों के उल्लंघन पाए जाने पर धारा 66/192(ए) मोटर वाहन अधिनियम के अंतर्गत कार्रवाई की गई है।

यातायात की कार्यवाही बना दिखावा

17 जून को पुलिस अधीक्षक ने यातायात और कोतवाली पुलिस को चावल से लदे ओव्‍हर लोड़ ट्रको पर कार्यवाही के निर्देश दिये। जहां कोतवाली पुलिस ने तत्‍काल ओव्‍हर लोड़ दो ट्रको पर कार्यवाही की गई। लेकिन यातायात पुलिस इस कार्यवाही बचती देखी गई। वहीं कोतवाली पुलिस की कार्यवाही के दूसरे दिन यातायात पुलिस मौके पर पहुंचकर 5 ट्रको की जांच की गई,  जिसमें तीन ट्रक अंडरलोड पाई गई। वहीं दो ट्रक जिनमें एमपी 09 एएल 9933 पर 20 हजार एवं एमपी 21 एच 6333 पर 21 हजार का जुर्माना लगाया गया। जबकि 17 जून को जिले के बीओटी गोदाम दारसागर, रामजानकी वेयर हाउस, श्री शिवाय वेयर हाउस एवं अन्‍नपूर्णा वेयर हाउस से 17 जून चावल से लदे लगभग 42 ट्रक ओव्‍हर लोड़ निकले थे, जिनमें दिन रात सड़को पर खड़े रहने वाली यातायात पुलिस ने सिर्फ 2 ट्रक ही ओव्‍हर लोड़ मिले।

यातायात को 42 ट्रको में सिर्फ 2 ट्रक ओव्‍हर लोड़ मिले

रेलवे रैक प्‍वाइंट के लिये जिले के चार गोदामों से 17 जून को निकले 42 ओव्‍हर लोड़ ट्रको में यातायात को सिर्फ 2 ट्रक ओव्‍हर लोड़ मिले। जबकि यातायात पुलिस इन दिनों दिन रात दो दो प्‍वांइट  बनाकर हाइवे में खड़े होकर यातायात नियमों के उल्‍लंघनन करने वाले वाहनों पर कार्यवाही की जा रही है। सूत्रो से मिली जानकारी के अनुसार बीओटी गोदाम दारसागर से चावल के 20 ट्रक, रामजानकी वेयर हाउस से 12, श्री शिवाय वेयर हाउस से 3 एवं अन्‍नपूर्णा वेयर हाउस से 7 ओव्‍हर लोड़ ट्रक निकले थे। एसपी के कड़े रूख अपनाने के बाद कई ओव्‍हर लोड़ ट्रक तुलसी वेयर हाउस मेडि़यारास में कार्यवाही होने से बचने के लिये खड़ी हो गई। इतना ही नही गायत्री ट्रांसपोर्टर द्वारा एक एक कर ट्रको को वेयर हाउस से बाहर निकालते हुये रेलवे रैक प्‍वांइट पहुंचाई जा रही है। वहीं 18 जून को लोड़ हुये सभी ट्रक अंडर लोड़ कर दिये गये है।

एसपी की कार्यवाही देख अंडर लोडिंग हुआ चालू

पूरे मामले में पुलिस अधीक्षक के सख्‍त निर्देशन और कड़ी निगरानी के बाद 18 जून को चारो वेयर हाउस से चावल अंडर लोड़ दिया जाने लगा। पुलिस अधीक्षक ने बताया कि सड़क दुर्घटनाओं को कम करने के लिये यातायात नियमों के अनुरूप से वाहनों में क्षमता से अधिक माल परिवहन करने वालों के खिलाफ सख्‍त कार्यवाही की जायेगी। वहीं जिला स्‍तरीय सड़क सुरक्षा समिति की बैठक 17 जून को कलेक्‍टर हर्षल पंचोली की उपस्थिति में में भी ओवरलोड वाहनों के बढ़ते संचालन को गंभीरता से लेते ऐसे वाहनों पर विशेष निगरानी रखने के निर्देश दिए गये थे। उन्होंने कहा कि ओवरलोडिंग न केवल सड़क सुरक्षा के लिए खतरा है।

अनूपपुर रेलवे रैक प्वाइंट पर करोड़ों के चावल परिवहन में बड़ा खेल?

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5 से 10 टन तक अतिरिक्त भार लादने के आरोप, निगम के अनुबंध की शर्तों पर उठे सवाल

खुले आसमान के नीचे हजारों बोरी चावल, बारिश में खराब होने का खतरा

अनूपपुर मध्य प्रदेश स्टेट सिविल सप्लाईज कॉर्पोरेशन के लिए किए जा रहे चावल परिवहन कार्य में कथित रूप से बड़े पैमाने पर अनियमितताओं का मामला सामने आया है। अनूपपुर रेलवे रैक प्वाइंट से मुरैना जिले के लिए भेजे जा रहे हजारों क्विंटल चावल के परिवहन में वाहनों की निर्धारित क्षमता से अधिक भार लादने, खाद्यान्न सुरक्षा मानकों की अनदेखी करने तथा अनुबंध की शर्तों का उल्लंघन किए जाने के आरोप लगे हैं। यदि आरोपों की निष्पक्ष जांच होती है और तथ्य सही पाए जाते हैं तो यह मामला केवल परिवहन नियमों के उल्लंघन तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि सार्वजनिक वितरण प्रणाली से जुड़े खाद्यान्न की सुरक्षा और सरकारी संसाधनों के संरक्षण पर भी गंभीर प्रश्न खड़े करेगा।

26 हजार क्विंटल चावल परिवहन में कथित गड़बड़ी

जानकारी के अनुसार अनूपपुर जिले के विभिन्न बीओटी गोदाम दारसागर, अन्नपूर्णा वेयरहाउस कोतमा, रामजानकी वेयरहाउस वेंकटनगर तथा श्री शिवाय वेयरहाउस से लगभग 26 हजार क्विंटल चावल ट्रकों के माध्यम से अनूपपुर रेलवे रैक प्वाइंट पहुंचाया जा रहा है। यह परिवहन कार्य निगम के परिवहनकर्ता गायत्री ट्रांसपोर्ट कटनी द्वारा किया जा रहा है। आरोप है कि परिवहन कार्य में लगाए गए अधिकांश ट्रकों में उनकी स्वीकृत वहन क्षमता से 5 से 10 टन तक अतिरिक्त भार लादा जा रहा है। यदि यह आरोप सही हैं तो यह न केवल मोटर वाहन कानूनों का उल्लंघन है बल्कि निगम और परिवहनकर्ता के बीच हुए अनुबंध की शर्तों के भी प्रतिकूल है।

अनुबंध की शर्तों की अनदेखी?

सूत्रों के अनुसार खाद्यान्न परिवहन से संबंधित अनुबंध में स्पष्ट प्रावधान है कि परिवहन में लगाए जाने वाले वाहनों पर निर्धारित क्षमता से अधिक भार नहीं लादा जाएगा। ओवरलोडिंग की स्थिति में दुर्घटना, माल क्षति तथा राजस्व हानि की जिम्मेदारी भी तय की जा सकती है। इसके बावजूद कथित रूप से नियमों को ताक पर रखकर वाहनों में अतिरिक्त भार भरकर उन्हें सड़कों पर दौड़ाया जा रहा है। सवाल यह उठ रहा है कि यदि वाहनों का नियमित सत्यापन और वजन परीक्षण किया जा रहा है तो फिर इतनी बड़ी मात्रा में ओवरलोडिंग कैसे संभव हो रही है?

मोटर वाहन अधिनियम के तहत दंडनीय अपराध

मोटर वाहन अधिनियम, 1988 तथा उससे संबंधित नियमों के तहत किसी भी मालवाहक वाहन में निर्धारित क्षमता से अधिक भार लेकर चलना दंडनीय अपराध है। ओवरलोडिंग पाए जाने पर वाहन स्वामी, परिवहनकर्ता और चालक के विरुद्ध जुर्माना, वाहन जब्ती तथा अन्य वैधानिक कार्रवाई की जा सकती है। वहीं ओवरलोड वाहनों के कारण सड़क दुर्घटनाओं की संभावना कई गुना बढ़ जाती है। ब्रेकिंग सिस्टम और वाहन नियंत्रण प्रभावित होता है, पुल-पुलियों एवं सड़कों को भारी नुकसान पहुंचने के साथ सार्वजनिक सुरक्षा खतरे में पड़ती है।

रेलवे रैक प्वाइंट पर खाद्यान्न सुरक्षा भी सवालों के घेरे में

मामले का दूसरा गंभीर पहलू खाद्यान्न सुरक्षा से जुड़ा हुआ है। आरोप है कि अनूपपुर रेलवे रैक प्वाइंट पर चावल की बोरियों को बिना पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था के खुले स्थान पर उतारा जा रहा है। स्थानीय सूत्रों के अनुसार रैक प्वाइंट पर एडवांस लोडिंग के लिए पर्याप्त प्लेटफॉर्म या संरक्षित भंडारण व्यवस्था उपलब्ध नहीं है। इसके बावजूद हजारों बोरी चावल खुले आसमान के नीचे रखे जाने की बात सामने आई है। वर्तमान समय में मानसून की सक्रियता और लगातार बदलते मौसम को देखते हुए खाद्यान्न के भीगने, खराब होने तथा गुणवत्ता प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है। जहां बाद में चावल की गुणवत्‍ता प्रभावित होने की प्रबल संभावना है।

सार्वजनिक वितरण प्रणाली पर पड़ सकता है असर

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि खाद्यान्न परिवहन और भंडारण के दौरान निर्धारित सुरक्षा मानकों का पालन नहीं किया जाता तो इसका सीधा असर सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) पर पड़ सकता है। बारिश या अनुचित रखरखाव के कारण चावल की गुणवत्ता प्रभावित होने पर सरकारी खजाने को नुकसान होने के साथ-साथ उपभोक्ताओं तक निम्न गुणवत्ता का खाद्यान्न पहुंचने का खतरा भी बढ़ जाता है। मामले में यदि वाहनों में क्षमता से अधिक भार लादा जा रहा था तो परिवहन कार्य की निगरानी करने वाले, वाहनों का वजन परीक्षण करने वाले,  निगम के जिम्मेदार अधिकारी, खाद्यान्न सुरक्षा के लिए क्या वैकल्पिक व्यवस्था की जिम्‍मेदारी, खुले में रखी गई चावल की बोरियों की जिम्मेदारी किसकी होगी?

स्थानीय लोगों ने उठाई निष्पक्ष जांच की मांग

मामले को लेकर स्थानीय नागरिकों ने गंभीर चिंता व्यक्त की है। उनका कहना है कि यदि सरकारी खाद्यान्न के परिवहन में नियमों की अनदेखी हो रही है तो इसकी उच्चस्तरीय जांच कराई जानी चाहिए। लोगों ने मांग की है कि परिवहन कार्य में लगे वाहनों का रिकॉर्ड, वजन पर्चियां, परिवहन अनुबंध की शर्तें तथा रेलवे रैक प्वाइंट पर की गई व्यवस्थाओं की जांच की जाए। साथ ही दोषी पाए जाने वाले परिवहनकर्ता एवं संबंधित अधिकारियों के विरुद्ध कठोर वैधानिक कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।

इनका कहना है

मुझे इस संबंध में कोई  जानकारी नही है, अगर परिहवन कार्य में लगे ट्रक में ओव्‍हर लोडिंग की जा रही है, तो इस संबंध में मै ठेकेदार से जानकारी लेती हॅू।

सीमा सिन्‍हा, प्रभारी प्रबंधक

नागरिक आपूर्ति निगम अनूपपुर

 

इनका कहना है

जानकारी मिली है, मेरे द्वारा कोतवाली पुलिस एवं यातायात विभाग को कार्यवाही के निर्देश दिये गये है।

विक्रांत मुराब, पुलिस अधीक्षक अनूपपुर

बिल में छुपे सपोलों को पकड़ने में समर्थ है हमारी पुलिस : सीएम डॉ. मोहन यादव

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आईजी कॉन्फ्रेंस में मुख्यमंत्री ने पुलिस की सराहना की, कानून व्यवस्था और साइबर सुरक्षा पर दिया जोर

भोपाल। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने शुक्रवार को पुलिस मुख्यालय में आयोजित राज्य स्तरीय आईजी कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए मध्यप्रदेश पुलिस की कार्यशैली और उपलब्धियों की सराहना की। उन्होंने कहा कि प्रदेशवासियों की सुरक्षा और कानून व्यवस्था के प्रति जनता का विश्वास बनाए रखना पुलिस का पहला कर्तव्य है। पीड़ितों के साथ संवेदनशील व्यवहार करते हुए त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित की जानी चाहिए।

पुलिस मुख्यालय पहुंचने पर मुख्यमंत्री को गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया। इस दौरान उन्होंने आगामी सिंहस्थ-2028 की तैयारियों को लेकर भी पुलिस अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि करोड़ों श्रद्धालुओं के इस महापर्व में मध्यप्रदेश पुलिस संवेदनशीलता, सतर्कता और सेवा भाव के साथ आदर्श व्यवस्था का उदाहरण प्रस्तुत कर सकती है।

साइबर अपराध और महिला सुरक्षा पर विशेष फोकस

मुख्यमंत्री ने साइबर अपराधों की रोकथाम, जन-जागरूकता, सड़क दुर्घटनाओं में कमी, मानव तस्करी पर नियंत्रण तथा महिला एवं बाल सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देने के निर्देश दिए। साथ ही धार्मिक स्थलों पर ध्वनि विस्तारक यंत्रों के उपयोग संबंधी न्यायालय के निर्देशों का प्रभावी पालन सुनिश्चित करने पर भी जोर दिया।

नक्सलवाद के खात्मे को बताया बड़ी उपलब्धि

कॉन्फ्रेंस के बाद मीडिया से बातचीत में मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश सरकार के कार्यकाल में पुलिस ने कई ऐतिहासिक उपलब्धियां हासिल की हैं। उन्होंने मंडला, बालाघाट और डिंडोरी जैसे क्षेत्रों में नक्सलवाद के प्रभाव को समाप्त करने में पुलिस की भूमिका की सराहना करते हुए कहा कि मध्यप्रदेश देश का पहला राज्य बना है जिसने अपने यहां नक्सलवाद के दंश को समाप्त करने में सफलता प्राप्त की है।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के मार्गदर्शन में पुलिस ने नक्सलवादियों के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई कर उत्कृष्ट कार्य का परिचय दिया है।

आतंकियों के सहयोगियों पर भी कसा शिकंजा

मुख्यमंत्री ने हाल ही में आतंकवादियों के सहयोगी की गिरफ्तारी का उल्लेख करते हुए कहा कि पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए पूरे षड्यंत्र का पर्दाफाश किया है। उन्होंने कहा, "हमारी पुलिस बिल में छुपे ऐसे सपोलों को पकड़ने में समर्थ है।" उनके अनुसार कार्रवाई के दौरान जिहादी मानसिकता से जुड़ा साहित्य भी बरामद किया गया है और पूरे नेटवर्क को ध्वस्त करने की दिशा में महत्वपूर्ण सफलता मिली है।

पुलिस भर्ती अभियान जारी

डॉ. यादव ने कहा कि पुलिस बल को और मजबूत बनाने के लिए सरकार लगातार भर्ती अभियान चला रही है। सब-इंस्पेक्टरों की भर्ती के साथ पिछले वर्ष से 22 हजार पदों पर भर्ती प्रक्रिया शुरू की गई है। सरकार का लक्ष्य है कि पुलिस विभाग में कोई भी पद रिक्त न रहे।

मुख्यमंत्री ने विश्वास जताया कि आधुनिक संसाधनों और बेहतर प्रशिक्षण के साथ मध्यप्रदेश पुलिस भविष्य की हर चुनौती का प्रभावी ढंग से सामना करेगी और प्रदेश में सुशासन को और मजबूत बनाएगी। 

Anuppur: जय अम्बे इंडस्ट्रीज प्राइवेट लिमिटेड के कार्यालय में दिनदहाड़े फायरिंग, कर्मचारी बाल-बाल बचा

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नौकरी दिलाने के दबाव को लेकर विवाद, तीन के खिलाफ मामला दर्ज, आरोपी फरार

अनूपपुरकोतवाली थाना क्षेत्र के ग्राम खांड़ा स्थित रामपुर बटुरा खदान क्षेत्र में संचालित जय अम्बे इंडस्ट्रीज प्राइवेट लिमिटेड के कार्यालय में रविवार को हुए गोलीकांड ने पूरे क्षेत्र में सनसनी फैला दी थी। कंपनी के एक कर्मचारी को निशाना बनाकर कथित तौर पर गोली चलाई गई, लेकिन सुरक्षा गार्ड की सतर्कता से बड़ा हादसा टल गया और कर्मचारी की जान बच गई। घटना के बाद कार्यालय परिसर में अफरा-तफरी का माहौल बन गया। मामले में कोतवाली पुलिस ने पप्पू विश्वकर्मा पिता गोविंद प्रसाद विश्‍वकर्मा, मिथलेश चर्मकार उर्फ लक्की पिता रामनरेश विश्‍वकर्मा और श्रीराम विश्वकर्मा पिता गोविंद प्रसाद के खिलाफ विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज कर उनकी तलाश शुरू कर दी है।

नौकरी दिलाने के दबाव से शुरू हुआ विवाद

पुलिस को दी गई शिकायत में कंपनी के टाइमकीपर अमन सिंह ने बताया कि कंपनी में कार्यरत हेल्पर पप्पू विश्वकर्मा और मिथलेश चर्मकार पिछले कई दिनों से अपने परिचित 8 से 10 लोगों को नौकरी पर रखने के लिए दबाव बना रहे थे। कंपनी प्रबंधन द्वारा उनकी मांग पूरी न किए जाने पर दोनों कर्मचारियों और अधिकारियों को लगातार धमकियां दे रहे थे। शिकायत के अनुसार 7 जून की सुबह भी दोनों आरोपियों ने कार्यालय परिसर में अमन सिंह के साथ गाली-गलौज की और धमकी दी। कंपनी के वरिष्ठ अधिकारी आलोक त्रिपाठी ने हस्तक्षेप कर मामला शांत कराने का प्रयास किया, लेकिन विवाद पूरी तरह खत्म नहीं हुआ।

कार्यालय में घुसकर किया हंगामा

दोपहर करीब 3 बजे जब कार्यालय में कर्मचारी लंच के बाद चर्चा कर रहे थे, तभी पप्पू विश्वकर्मा, मिथलेश चर्मकार और श्रीराम विश्वकर्मा वहां पहुंचे। आरोप है कि तीनों ने कर्मचारियों के साथ अभद्र व्यवहार करते हुए फिर से नौकरी देने की मांग दोहराई। इसी दौरान माहौल अचानक तनावपूर्ण हो गया। शिकायत के मुताबिक पप्पू विश्वकर्मा ने अमन सिंह को गोली मारने की बात कही, जबकि मिथलेश चर्मकार ने श्रीराम विश्वकर्मा को कट्टा निकालने के लिए उकसाया।

सुरक्षा गार्ड की सूझबूझ से टला बड़ा हादसा

आरोप है कि श्रीराम विश्वकर्मा ने देशी कट्टा निकालकर अमन सिंह पर तान दिया और फायर कर दिया। गोली चलने की आवाज सुनकर मौके पर पहुंचे सुरक्षा गार्ड ने तत्काल हस्तक्षेप करते हुए आरोपी को धक्का दे दिया। गार्ड की इसी सतर्कता के कारण गोली अमन सिंह को नहीं लगी और कार्यालय के फर्श में जा धंसी। घटना के बाद कर्मचारियों में दहशत फैल गई। मौके पर मौजूद कर्मचारियों और अन्य लोगों ने किसी तरह स्थिति को नियंत्रित किया। इसके बाद तीनों आरोपी कथित रूप से जान से मारने की धमकी देते हुए वहां से फरार हो गए।

पुलिस ने जुटाए साक्ष्य, आरोपियों की तलाश जारी

घटना की सूचना मिलते ही कोतवाली निरीक्षक अरविंद जैन मौके पर पहुंची और घटनास्थल का निरीक्षण किया। पुलिस ने कार्यालय के फर्श में धंसी गोली सहित अन्य महत्वपूर्ण साक्ष्य जब्त किए हैं। मामले में पुलिस ने तीनों आरोपियों के खिलाफ बीएनएस की धारा 109(1), 296(बी), 351(2), 331(7), 333, 3(5), 25, 27 के तहत अपराध दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए लगातार दबिश दी जा रही है और जल्द ही उन्हें हिरासत में लेकर पूछताछ की जाएगी।

Anuppur बस स्टैंड के सुलभ कॉम्प्लेक्स में मिला मृत नवजात

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अनूपपुर अनूपपुर नगर के बस स्टैंड स्थित सुलभ कॉम्प्लेक्स के शौचालय में शनिवार शाम एक अज्ञात नवजात शिशु (बालक) का शव मिलने के बाद पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पहचान और आरोपियों की तलाश शुरू की। रविवार को शव का पोस्टमार्टम कराए जाने के बाद पुलिस और सामाजिक कार्यकर्ताओं की मौजूदगी में सोन नदी किनारे स्थित मुक्तिधाम में दफनाकर अंतिम संस्कार किया गया। पुलिस अज्ञात महिला और अन्य संभावित आरोपियों की तलाश कर रही है। पुलिस ने आम लोगों से अपील की है कि यदि इस घटना के संबंध में कोई जानकारी हो तो तुरंत कोतवाली अनूपपुर से संपर्क करें।

सूचना मिलते ही मौके पर पहुंची पुलिस

कोतवाली पुलिस को शनिवार शाम सूचना मिली कि बस स्टैंड परिसर के सुलभ कॉम्प्लेक्स के शौचालय में एक नवजात मृत अवस्था में पड़ा है। सहायक उप निरीक्षक महिपाल प्रजापति पुलिस दल के साथ मौके पर पहुंचे और शव को कब्जे में लेकर जिला चिकित्सालय के शव परीक्षण कक्ष के फ्रीजर में सुरक्षित रखवाया। रविवार दोपहर डॉक्टर द्वारा शव परीक्षण कराया गया। इसके बाद सोन नदी किनारे स्थित मुक्तिधाम में दफनाने की व्यवस्था की गई। पुलिस ने बताया कि नवजात को जन्म देने वाली अज्ञात महिला और अन्य संभावित आरोपियों की पहचान के लिए विभिन्न माध्यमों से लगातार खोजबीन की जा रही है। सीसीटीवी फुटेज, स्थानीय पूछताछ और अन्य तकनीकी व मानवीय स्रोतों की मदद से जांच आगे बढ़ाई जा रही है।

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