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Anuppur: गायब 24 ईवीएम मशीनें मिली, नॉनवर्किंग मशीनें मरम्‍मत हेतु 2021 में भेजी गई थी भोपाल

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शिफ्टिंग और मौके पर भौतिक सत्यापन ना करना प्रशासन की सबसे बड़ी रही लापरवाही

अनूपपुर। जिला मुख्यालय स्थित पुराने तहसील कार्यालय अनूपपुर के पीछे बने ईव्‍हीएम वेयरहाउस से 24 ईव्‍हीएम मशीनें गायब मिलने के मामले ने प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। मामले में 30 सितम्‍बर को शिकायत दर्ज कराई गई, जिसके आधार पर कोतवाली पुलिस ने अज्ञात व्यक्ति के खिलाफ बीएनएस की धारा 331(4) और 305(ए) के तहत प्रकरण दर्ज कर जांच शुरू कर दी थी। 24 ईवीएम मशीनों के गायब होने के बाद जिला प्रशासन में हड़कंप मच गया। जांच के दौरान सामने आए दस्तावेजों के अनुसार गायब बताई जा रही 24 ईवीएम मशीनों को वर्ष 2021 में नॉनवर्किंग होने के कारण उन्‍हे नोडल मुख्यालय भोपाल भेजे जाने संबंधी पत्र मिला और गायब ईव्‍हीएम मशीन का पता चल सका।

नॉनवर्किंग 24 ईव्ही एम को भेजा गया था भोपाल

जांच में मिले रिकॉर्ड के अनुसार राज्य निर्वाचन आयोग भोपाल द्वारा पत्र क्रमांक 82-11/2021021/8/156, दिनांक 6 अक्टूबर 2021 के माध्यम से जिले में संधारित नॉनवर्किंग ईव्ही एम मशीनों एवं डीकोड प्रिंटर्स को नोडल मुख्यालय भोपाल में संग्रहित कराने के निर्देश दिए गए थे। इसके बाद कार्यालय कलेक्टर एवं जिला निर्वाचन अधिकारी अनूपपुर द्वारा 11 अक्टूबर 2021 को पत्र क्रमांक 347/347/स्था./निर्वा. ईवीएम/2021 जारी किया गया। इसके तहत 24 नॉनवर्किंग ईवीएम मशीनें, जिनमें 8 बैलेट यूनिट और 16 कंट्रोल यूनिट तथा एक डीकोड प्रिंटर भोपाल के उपसंग्रहण केंद्र में जमा कराया गया था, उक्तन पत्र के माध्यंम से भेजे गये ईव्‍हीएम मशीन के सीरियल नंबर का मिलान किया गया, जो एफआईआर में दर्ज सीरियल नंबर से मेल खा चुके है।

मरम्मत के लिए हैदराबाद भेजी जानी थीं मशीनें

निर्वाचन आयोग के निर्देशों के अनुसार नॉनवर्किंग ईव्हीएम मशीनों को मरम्मत के लिए ईसीआईएल हैदराबाद भेजे जाने की प्रक्रिया प्रस्तावित थी। रिकॉर्ड में जिले की नॉनवर्किंग मशीनों में 16 कंट्रोल यूनिट, 8 बैलेट यूनिट, 2 एडी यूनिट और एक डिकोड प्रिंटर का उल्लेख है। इन मशीनों को भोपाल स्थित चयनित शासकीय उवेदिया हाई स्कूल, रॉयल मार्केट, हमीदिया अस्पताल के सामने बनाए गए उपसंग्रहण केंद्र में जमा कराया गया था। रिकॉर्ड के मुताबिक राजस्व निरीक्षक गनीशाय पैकरा एवं कंप्यूटर ऑपरेटर राम सेवक चौधरी द्वारा भोपाल ले जाकर जमा कराया गया था।

प्रशासन की लापरवाही और भौतिक सत्यापन पर सवाल

पुराने तहसील कार्यालय को पॉलीटेक्निक महाविद्यालय अनूपपुर में शिफ्ट करने के दौरान ईव्‍हीएम वेयरहाउस में रखी मशीनों को समय पर नए स्थान पर शिफ्ट नहीं किया जाना प्रशासनिक लापरवाही माना जा रहा है। पुराने तहसील कार्यालय के डिसमेंटल के दौरान दीवार गिराए जाने पर ईव्हीनएम के बड़े-बड़े बॉक्स मिले, जिसकी सूचना ठेकेदार ने प्रशासन को दी। लेकिन जब तहसील कार्यालय शिफ्ट हो चुका था, तो प्रशासन ईव्‍हीएम मशीन को शिफ्ट करना कैसे भूल गई। इसके बाद 21 सितंबर 2026 को मशीनों को नए स्थान पर शिफ्ट किया गया, लेकिन शिफ्टिंग के दौरान मौके पर मशीनों का तत्काल भौतिक सत्यापन नहीं किया गया। जिसके कारण प्रशासनिक स्तर पर कई सवाल खड़े हो गये हैं।

Anuppur: यातायात विभाग की कार्यप्रणाली से बदनाम हो रहा अनूपपुर जिला

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नो-एंट्री में भारी वाहनों की आवाजाही से अनूपपुर की यातायात व्यवस्था सवालों के घेरे में

प्रभारी अक्षमता से व्यवस्था चौपट, नो-एंट्री के पालन और इंट्री वसूली बनी फजीहत

अनूपपुर। जिला मुख्यालय अनूपपुर की यातायात व्यवस्था एक बार फिर सवालों के घेरे में है। शहर में निर्धारित नो-एंट्री व्यवस्था के बावजूद भारी वाहनों की आवाजाही, हाइवें वा मुख्‍य मार्गो में इंट्री वसूली रूकने के नाम नही ले रही है। जिसके कारण प्रमुख मार्गों और शहर के व्यस्त हिस्सों में यातायात का दबाव बढ़ने के साथ जाम की स्थिति निर्मित होने और दुर्घटनाओं की आशंका भी बनी हुई है। जिसके बाद जाम की स्थिति को संभालने के लिय कई बार कोतवाली पुलिस को सामने आना पड़ा है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर कार शहर में यातायात व्‍यवस्‍था को बनाये रखने के लिये चौक चौराहो में बनाये गये प्‍वांइट से यातायात बल कहां गायब हो जाती है। यातायात प्रभारी विनोद दुबे जिला मुख्‍यालय की यातायात व्यवस्था को नियंत्रित करने में पूरी तरह से नाकाम है। जनचर्चा है कि यातायात अमले की प्राथमिकता शहर की यातायात व्यवस्था को सुचारु बनाना है या फिर वाहन जांच और चालानी कार्रवाई सहित वाहनों से इंट्री वसूलने तक सीमित है।

बदनाम हो रहा अनूपपुर जिला

यातायात विभाग की निष्क्रियता के साथ ही अनूपपुर जिला हाईवे पर कथित इंट्री वसूली को लेकर भी बदनाम हो रहा है। शहर के प्रवेश द्वारों से लेकर हाईवे तक भारी वाहनों की आवाजाही के बीच यातायात अमले की मौजूदगी को लेकर लोगो में तरह-तरह की चर्चाएं हैं। जिले से होकर गुजरने वाले वाहन चालकों तथा लोगो का कहना है कि प्रदेश के अन्य जिलों में हाईवे पर यातायात पुलिस की मौजूदगी कम ही दिखाई देती है, लेकिन अनूपपुर जिले की सीमा में प्रवेश करते ही हाईवे पर यातायात अमला सक्रिय नजर आता है। यहां इंट्री के नाम पर वसूली की जाती है, जो प्रदेश भरमें अनूपपुर जिले की छवि बदनाम हो रही हैं।


नो-एंट्री व्यवस्था पर सबसे बड़ा सवाल

अनूपपुर जिला मुख्यालय में भारी वाहनों के प्रवेश को नियंत्रित करने के लिए नो-एंट्री व्यवस्था बनाई गई है। इसका उद्देश्य शहर के अंदर यातायात का दबाव कम करना और आम नागरिकों को जाम तथा दुर्घटनाओं के जोखिम से राहत देना है। लेकिन यदि प्रतिबंधित समय में भी भारी वाहन शहर की सड़कों पर प्रवेश करते हैं तो यह व्यवस्था की प्रभावशीलता पर गंभीर सवाल खड़ा करता है। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि कई बार भारी वाहनों की आवाजाही के कारण छोटे वाहनों, दोपहिया चालकों और पैदल राहगीरों को परेशानी का सामना करना पड़ता है। बाजार क्षेत्र, बस स्‍टैण्‍ड और प्रमुख चौराहों पर वाहनों का दबाव बढ़ने से यातायात की गति प्रभावित होती है। ऐसे में नो-एंट्री के नियमों का सख्ती से पालन क्‍यो नही किया जा रहा है।

इंट्री वसूली में मशगूल यातायात पुलिस

जानकारी के अनुसार यातायात अमले में पदस्‍थ बल जो लगातार कई वर्षो से यातायात थाने में पैर जमाये हुए है, क्‍या इन बलो को सिर्फ यातायात थाने के लिए रिर्जव रखा गया है। अनूपपुर-बिजुरी, अनूपपुर-अमरकंटक, अनूपपुर-वेंकटनगर और अनूपपुर-शहडोल मार्ग शहर के प्रमुख संपर्क मार्ग हैं। इन मार्गों पर यातायात अमले की तैनाती और वाहन जांच की गतिविधियां प्रत्‍येक दिन और हर समय दिखाई देती हैं। इसके बावजूद शहर के भीतर जाम, पार्किंग, भारी वाहनों की आवाजाही और नो-एंट्री के पालन जैसी समस्याएं पूरी तरह नियंत्रित नहीं हो पा रही हैं। यदि प्रमुख मार्गों पर पर्याप्त यातायात बल तैनात है, तो शहर के प्रवेश बिंदुओं पर ही भारी वाहनों की निगरानी क्यों नहीं की जाती? यदि नो-एंट्री का समय निर्धारित है तो उस दौरान प्रवेश करने वाले वाहनों का रिकॉर्ड क्यों नहीं सार्वजनिक किया जाता? वहीं यदि किसी विशेष परिस्थिति में किसी भारी वाहन को प्रवेश की अनुमति दी जाती है तो उसके लिए निर्धारित नियम और प्रक्रिया क्या है, इसकी जानकारी भी सार्वजनिक होनी चाहिए।

चालानी कार्रवाई बनाम यातायात व्यवस्था सुधारने की बहस

स्थानीय स्तर पर यह चर्चा भी सामने आ रही है कि यातायात पुलिस की सक्रियता मुख्य मार्गों पर चालानी कार्रवाई की नाम पर इंट्री वसूलने में अधिक दिखाई देती है, जबकि शहर की मूलभूत यातायात समस्याएं अभी भी बनी हुई हैं। जनचर्चा है कि अनूपपुर से गुजरने वाले मार्गों पर जांच और चालानी कार्रवाई का सामना लोगो को करना पड़ता है। ऐसे में सवाल यह है कि चालानी कार्रवाई के साथ-साथ शहर के यातायात प्रबंधन पर भी उतना ही ध्यान दिया जा रहा है या नहीं। चालानी कार्रवाई स्वयं यातायात नियमों के पालन का हिस्सा है, लेकिन इसके साथ नो-एंट्री, पार्किंग, जाम और भारी वाहनों के प्रवेश जैसे मुद्दों पर भी प्रभावी कार्रवाई अपेक्षित है। लेकिन वाहनो से इंट्री वसूलना यातायात के किन नियमों में आता है।

यातायात प्रभारी की कार्यप्रणाली पर उठ रहे सवाल

यातायात प्रभारी विनोद दुबे की कार्यप्रणाली को लेकर भी स्थानीय स्तर पर सवाल उठाए जा रहे हैं। कुछ नागरिकों और वाहन चालकों का आरोप है कि यातायात अमले की प्राथमिकता वाहन जांच और चालानी कार्रवाई पर अधिक दिखाई देती है, जबकि शहर की यातायात व्यवस्था से जुड़े मूल सवालों का स्थायी समाधान नहीं हो पा रहा है। आये दिन सोशल मीडिया में नो इंट्री के समय भारी वाहनो के प्रवेश, शहर  में ओव्‍हर स्‍पीड़ दौड़ रहे भारी वाहनो का वीडियो हजारों बार सामने आया है। लेकिन यातायात प्रभारी को यातायात के इन नियमों के पालन के लिये गहरी निंद्रा से उठाना अब संभव नही हो पा रहा है।

शहर की सड़कों पर बढ़ रहा यातायात दबाव

अनूपपुर जिला मुख्यालय में लगातार बढ़ती वाहन संख्या के बीच यातायात प्रबंधन की चुनौती भी बढ़ रही है। बाजार क्षेत्रों में पार्किंग की समस्या, सड़क किनारे खड़े वाहन, भारी वाहनों की आवाजाही और व्यस्त चौराहों तिराहो पर यातायात दबाव आम लोगों के लिए परेशानी का कारण बनता जा रहा है। ऐसे में यातायात व्यवस्था को प्रबंधित करने की जरूरत महसूस की जा रही है। प्रवेश और निकास बिंदुओं पर निगरानी, नो-एंट्री के समय का सख्त पालन, पार्किंग व्यवस्था, प्रमुख चौराहों पर प्रभावी तैनाती और नियम तोड़ने वाले वाहनों पर कार्रवाई से यातायात व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिये यातायात प्रभारी पूरी तरह से नाकाम साबित हो रहे है।

प्रशासन और पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों में चुप्‍पी

स्थानीय नागरिकों का कहना है कि जिला मुख्यालय की यातायात व्यवस्था सीधे तौर पर आम लोगों की सुरक्षा और सुविधा से जुड़ा विषय है। इसलिए पुलिस और प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों को इस मामले में स्पष्ट स्थिति सामने रखनी चाहिए। नागरिकों की मांग है कि पुलिस अधीक्षक विक्रांत मुरान एवं जिला प्रशासन द्वारा नो-एंट्री व्यवस्था की कैसी समीक्षा की जाती है, जिसके कारण यातायात व्‍यवस्‍था दिन प्रतिदिन बद से बदत्‍तर होती जा रही है। आखिकर कार यातायात प्रबंधन के लिये यातायात प्रभारी अपनी जिम्मेदारी से क्‍यो भागते नजर आ रहे है?

अनूपपुर के 24 ईव्‍हीएम मशीन चोरी, पुराने तहसील भवन से मशीनें हटाने के दौरान खुला मामला

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भौतिक सत्यापन में
8 बैलेट और 16 कंट्रोल यूनिट मिलीं कम, पुराने तहसील भवन से हटाते समय खुला मामला

अनूपपुर। जिला मुख्यालय स्थित पुराने तहसील कार्यालय के पीछे बने ईवीएम वेयरहाउस की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। यहां सुरक्षित रखी गई ईवीएम मशीनों में से 24 मशीनें गायब मिलने के बाद मामला पुलिस तक पहुंच गया है। मामले में 30 सितम्‍बर को प्राथमिक विद्यालय सीतापुर के सहायक शिक्षक फूल सिंह पिता धना सिंह निवासी कर्राटोला ने  तहसीलदार अनूपपुर वेद प्रकाश सिंह तथा प्राथमिक विद्यालय बस्ती के सहायक शिक्षक संजय निगम के साथ कोतवाली पहुंच शिकायत दर्ज कराई। जिसके आधार पर कोतवाली पुलिस ने अज्ञात व्यक्ति के खिलाफ बीएनएस की धारा 331(4) और 305(ए) के तहत प्रकरण दर्ज कर जांच शुरू की गई है। मामला उस समय सामने आया, जब पुराने तहसील भवन क्षतिग्रस्‍त होने के कारण उसे डिसमेंटल कराया जा रहा था। इस दौरान ईवीएम मशीनों को पॉलीटेक्निक महाविद्यालय में संचालित तहसील कार्यालय के कक्ष पर स्थानांतरित करने की कार्रवाई की जा रही थी। इसी दौरान संबंधित पुराने तहसील कार्यालय भवन के पीछे बने ईव्‍हीएम वेयर हाउस भवन की दीवार क्षतिग्रस्त मिली। इसके बाद मशीनों का भौतिक सत्यापन कराया गया तो रिकॉर्ड और मौके पर उपलब्ध मशीनों की संख्या में अंतर सामने आया।

24 मशीनों का नहीं मिला कोई सुराग

शिकायत के अनुसार भौतिक सत्यापन के दौरान कुल 24 ईवीएम मशीनें कम पाई गईं। इनमें 8 बैलेट यूनिट (बीयू) और 16 कंट्रोल यूनिट (सीयू) शामिल हैं। मशीनों के सीरियल नंबर भी शिकायत में दर्ज किए गए हैं, जिससे पुलिस जांच में इनके रिकॉर्ड, आवंटन और संभावित आवाजाही की जानकारी जुटाने में मदद मिल सकती है। मामले की गंभीरता इस बात से भी समझी जा सकती है कि ये मशीनें निर्वाचन प्रक्रिया से संबंधित महत्वपूर्ण सरकारी सामग्री हैं। ऐसे में इनके रिकॉर्ड से गायब होने का मामला सामने आने के बाद संबंधित अधिकारियों और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सवाल उठना स्वाभाविक है।

2014 के पंचायत चुनाव के बाद से सुरक्षित थीं मशीनें

शिकायत में बताया गया है कि वर्ष 2014 में स्थानीय निर्वाचन यानी पंचायत चुनाव के लिए अनूपपुर के पुराने तहसील कार्यालय में बड़ी संख्या में ईवीएम मशीनें सुरक्षित रखी गई थीं। रिकॉर्ड के मुताबिक वहां 620 कंट्रोल यूनिट और 1670 बैलेट यूनिट रखी गई थीं। मशीनों को पुराने तहसील भवन के पीछे बने वेयरहाउस में सुरक्षित रखा गया था। लंबे समय तक मशीनें इसी परिसर में रखी रहीं। भवन की हालत खराब होने के बाद जब इन्हें वहां से हटाने की प्रक्रिया शुरू हुई, तभी वेयरहाउस की स्थिति और मशीनों के रिकॉर्ड का भौतिक मिलान किया गया।

दीवार क्षतिग्रस्त मिलने पर उठे चोरी के सवाल

शिकायत के मुताबिक 16 मार्च को पुराने तहसील भवन से ईवीएम मशीनों को हटाने की कार्रवाई के दौरान संबंधित कमरे के पीछे की दीवार क्षतिग्रस्त मिली। दीवार की स्थिति सामने आने के बाद वहां रखी मशीनों की सुरक्षा और उपलब्धता को लेकर जांच की गई। इसके बाद ईवीएम मशीनों को पुराने भवन से हटाकर वर्तमान में पॉलीटेक्निक महाविद्यालय अनूपपुर में संचालित तहसील कार्यालय के भूतल स्थित कक्ष क्रमांक 6 में 21 सितंबर को रखा गया। मशीनों को नए स्थान पर रखने के बाद 24 सितंबर से 28 सितंबर 2026 के बीच भौतिक सत्यापन कराया गया। इसी सत्यापन में रिकॉर्ड में दर्ज मशीनों और मौके पर उपलब्ध मशीनों के बीच अंतर सामने आया और 24 मशीनें कम मिलीं।

ईव्‍हीएम वेयरहाउस की सुरक्षा पर सवाल

ईवीएम जैसी संवेदनशील निर्वाचन सामग्री लंबे समय तक जिस भवन में सुरक्षित रखी गई, वहां से मशीनों का गायब होना अपने आप में कई सवाल खड़े करता है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि मशीनें कब गायब हुईं और इसकी जानकारी इतने समय बाद कैसे सामने आई? इसके अलावा पुराने वेयरहाउस की सुरक्षा व्यवस्था कैसी थी, वहां प्रवेश और निकासी का रिकॉर्ड रखा जाता था या नहीं, कमरे की निगरानी किसके जिम्मे थी। चूंकि मशीनें वर्ष 2014 से संबंधित रिकॉर्ड का हिस्सा बताई गई हैं, इसलिए जांच का दायरा केवल चोरी की घटना तक सीमित न रहकर मशीनों के भंडारण, सुरक्षा, रिकॉर्ड संधारण और स्थानांतरण की पूरी प्रक्रिया तक जा सकता है।

सीरियल नंबर से खुलेगा मशीनों का पूरा ट्रैक

गायब हुई 8 बैलेट यूनिट और 16 कंट्रोल यूनिट के सीरियल नंबर शिकायत में दर्ज होने से जांच के दौरान इनके रिकॉर्ड का मिलान किया जा सकता है। पुलिस और संबंधित विभाग यह पता लगाने का प्रयास कर सकते हैं कि मशीनें अंतिम बार कब सत्यापित हुई थीं, किस रिकॉर्ड में दर्ज थीं और पुराने वेयरहाउस में उनके रखे होने की पुष्टि कब हुई थी। मामले में अब यह भी महत्वपूर्ण होगा कि जांच एजेंसी पुराने तहसील भवन के वेयरहाउस से संबंधित उपलब्ध रिकॉर्ड, निरीक्षण रिपोर्ट, सुरक्षा व्यवस्था और स्थानांतरण से जुड़े दस्तावेजों की जांच करे।

एफआईआर के बाद कई सवालों के जवाब तलाशेगी जांच

कोतवाली पुलिस ने शिकायत के आधार पर अज्ञात के खिलाफ प्रकरण दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। अब जांच में यह स्पष्ट होना बाकी है कि 24 ईवीएम मशीनें वास्तव में कब गायब हुईं, क्या इन्हें चोरी कर बाहर ले जाया गया या रिकॉर्ड और भौतिक उपलब्धता के बीच किसी अन्य कारण से अंतर आया। फिलहाल 24 ईवीएम मशीनों के गायब होने और पुराने क्षतिग्रस्‍त तहसील भवन अनूपपुर के डिसमेंटल किेये जाने के कार्य आदेश के बाद भी ईव्‍हीएम वेयर हाउस से ईव्‍हीएम को पहले क्‍यो नही हटाया गया। जिस पर जिला प्रशासन पर निर्वाचन सामग्री की सुरक्षा और रिकॉर्ड व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। पुलिस जांच और संबंधित विभाग के रिकॉर्ड की पड़ताल के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि इन मशीनों के गायब होने के पीछे वास्तविक घटनाक्रम क्या रहा।

इनका कहना है

शिकायत मिलने और मामले की गंभीरता को देखते हुए तत्‍काल एफआईआर दर्ज कर मामले की जांच शुरू कर दी गई है।

उमेश उपाध्‍याय, कोतवाली निरीक्षक अनूपपुर


अनूपपुर में यातायात व्यवस्था बेपटरी, हाईवे चौकी फुनगा का बल हटने से सुरक्षा पर सवाल

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प्रमुख चौराहों पर यातायात जवान नदारद
, ऑटो-हाथठेलों से जाम, नो-एंट्री व्यवस्था पर गंभीर सवाल

अनूपपुर। शहर की यातायात व्यवस्था को सुचारु रखने की जिम्मेदारी यातायात पुलिस की है, लेकिन अनूपपुर शहर में जमीनी तस्वीर इसके उलट नजर आने के आरोप हैं। शहर के प्रमुख चौराहों पर आए दिन जाम, बेतरतीब खड़े ऑटो और हाथठेले तथा यातायात पुलिस की कथित गैरमौजूदगी को लेकर आमजन में नाराजगी बढ़ती जा रही है। यातायात थाना प्रभारी विनोद दुबे के कार्यकाल के दौरान यातायात व्यवस्था के पूरी तरह से बेपटरी हो चुकी हैं। शहर के सामतपुर तिराहा, बस स्टैंड, स्टेशन तिराहा, इंदिरा तिराहा और अमरकंटक तिराहा जैसे व्यस्ततम स्थानों पर यातायात पुलिस के जवान नियमित रूप से व्यवस्था संभालने में  नाकाम है।

फुनगा हाईवे चौकी बंद होने से सुरक्षा पर बड़ा सवाल

शहडोल-मनेन्द्रगढ़ हाईवे पर स्थित यातायात हाईवे चौकी फुनगा को सड़क सुरक्षा और दुर्घटनाओं की स्थिति में त्वरित सहायता एवं प्रशासनीक व्‍यवस्‍था में सुधार के उद्देश्य से पुलिस मुख्‍यालय भोपाल द्वारा संचालित किया गया था। लेकिन चौकी में तैनात बल को यातायात थाना से संबद्ध कर दिया गया, जिसके कारण हाईवे चौकी बिना कर्मचारियों के है, जबकि चौकी खोलने का कारण हाइवे में होने वाली दुर्घटनाओं पर तत्काल सहायता उपलब्ध कराना था। स्थानीय लोगों का कहना है कि चौकी संचालित रहने के दौरान दुर्घटना की स्थिति में पुलिस बल तत्काल मौके पर पहुंचकर सहायता उपलब्ध कराता था। अब बल हटने के बाद दुर्घटना की स्थिति में त्वरित प्रतिक्रिया को लेकर चिंता बढ़ गई है।

यातायात थाना का बढ़ा बल, फिर भी व्यवस्था जस की तस

बताया गया है कि पुलिस अधीक्षक द्वारा बल की कमी को देखते हुए यातायात हाईवे चौकी फुनगा में तैनात बल को भी यातायात थाना से संबद्ध किया गया। इसके बावजूद शहर की यातायात व्यवस्था में अपेक्षित सुधार दिखाई नहीं दे रहा है। सवाल यह भी उठ रहा है कि जब यातायात पुलिस के पास अतिरिक्त बल उपलब्ध कराया गया है, तो शहर के प्रमुख चौराहों पर यातायात नियंत्रण के लिए पर्याप्त जवान क्यों नहीं दिखाई देते?

नो-एंट्री के नियमों पर भी सवाल

अनूपपुर शहर में दुर्घटनाओं की रोकथाम के उद्देश्य से सुबह 6 बजे से रात 10 बजे तक भारी वाहनों के प्रवेश पर नो-एंट्री लागू होने की बात कही गई है। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि इस व्यवस्था का प्रभावी ढंग से पालन नहीं कराया जा रहा है और कुछ भारी वाहनों को कथित रूप से नियमों से छूट देकर शहर में प्रवेश कराया जाता है। जिससे पूरे शहर की व्‍यवस्‍था पूरी तरह से बेतरतीब हो चुकी है।

हाईवे पर ड्यूटी या वसूली?

यातायात पुलिस के कुछ जवानों को शहर की यातायात व्यवस्था के बजाय सरई रोड, पेंड्रा रोड और शहडोल-मनेन्द्रगढ़ मार्ग, जैतहरी-वेंकटनगर मार्ग पर लंबे समय तक तैनात देखे जाते है। सुबह करीब 8 बजे से देर रात तक दो टीमों के माध्यम से वाहनों की चेकिंग के नाम पर हाईवे में इनके द्वारा ऐसी कौन सी जांच की जाती है,  जो शहर की यातायात व्‍यवस्‍था को यातायात पुलिस द्वारा दरकिनार कर दिया जाता है। जानकारी के अनुसार यातायात थाना प्रभारी के कुछ चुनिंदा जवानों के माध्यम से यह पूरा तंत्र संचालित किया जा रहा है।

मंथली टोकन से चल रहा यातायात विभाग

सबसे गंभीर आरोप यह है कि शहर से गुजरने वाले भारी एवं मध्यम मालवाहक वाहन, यात्री बस, स्कूली बस और ऑटो से प्रतिमाह तक की मंथली वसूली के नाम पर टोकन काटे जाते है। इस टोकन से भारी ओव्‍हरलोड़ वाहन को एक माह तक छूट दी जाती है। जो वाहन चालक या मालिक टोकन नहीं लेता, उन्हें कार्रवाई के नाम पर परेशान किया जाता है।

कानून व्यवस्था के नाम पर निजी वाहन अधिग्रहण

जिले की यातायात व्‍यवस्‍था के नाम यातायात प्रभारी कानून व्यवस्था के नाम पर निजी वाहनों का अधिग्रहण कर उनका उपयोग हाईवे पर चेकिंग और वसूली संबंधी गतिविधियों में किया जाता है। यह जांच का विषय है कि निजी वाहनों के अधिग्रहण के लिए किस आदेश या वैधानिक प्रक्रिया का पालन किया जा रहा है और उनका वास्तविक उपयोग किस उद्देश्य से किया जा रहा है।

सबसे बड़ा सवाल—शहर संभालेगा कौन?

अनूपपुर शहर में यदि प्रमुख चौराहों पर नियमित यातायात ड्यूटी नहीं लग रही, नो-एंट्री प्रभावी नहीं है और यातायात बल का बड़ा हिस्सा हाईवे पर तैनात है, तो शहर की यातायात व्यवस्था की जिम्मेदारी कौन संभाल रहा है? आम नागरिकों के लिए यह सिर्फ जाम का सवाल नहीं है। यह सड़क सुरक्षा, दुर्घटना रोकथाम और पुलिस व्यवस्था पर सवाल है। आये दिन नो इंट्री के समय भारी वाहनों का प्रवेश, शहर की यातायात व्‍यवस्‍था की पोल, जाम  की स्थिति वाली वीडियो सोशल मीडिया में वॉयरल होती है, बावजूद इसके वरिष्‍ठ अधिकारियों द्वारा सब कुछ जानते हुए यातायात की अव्‍यवस्‍था के नाम पर चुप्‍पी साध अपनी जिम्‍मेदारी से पीछा छुड़ाने में लगे हुए है।

Jaitahari - 48 घंटे में हत्याकांड का खुलासा, पांच आरोपी गिरफ्तार

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जैतहरी हत्याकांड का खुलासा करने के बाद पुलिस की गिरफ्त में पांचों आरोपी
जैतहरी हत्याकांड का खुलासा करने के बाद पुलिस की गिरफ्त में पांचों आरोपी

पुरानी प्रेम संबंध की बात पर हुआ विवाद, बेल्ट से गला दबाकर युवक की हत्या

जंगल की झाड़ियों में फेंका शव, बाइक, कार, कपड़े और पर्स सहित अन्य सामग्री जब्त

इंट्रो- जैतहरी थाना क्षेत्र में 22 वर्षीय आदिवासी युवक गोवर्धन कोल की हत्या के मामले का पुलिस ने 48 घंटे के भीतर खुलासा करते हुए पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस के अनुसार पुरानी प्रेम संबंध की बात को लेकर हुए विवाद के बाद युवक की बेल्ट से गला दबाकर हत्या की गई और साक्ष्य छिपाने के लिए शव को जंगल में फेंक दिया गया। पुलिस ने आरोपियों की निशानदेही पर कथित हत्या में प्रयुक्त सामान, बाइक, ईको कार, कपड़े और मृतक का पर्स बरामद किया है।

अनूपपुर। जैतहरी थाना क्षेत्र में 22 वर्षीय युवक की हत्या के मामले में पुलिस ने 48 घंटे के भीतर कार्रवाई करते हुए पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस के अनुसार मृतक के चचेरे भाई और मुख्य आरोपी की चचेरी बहन के बीच पूर्व में रहे प्रेम संबंध को लेकर पुरानी रंजिश थी। इसी बात को लेकर 23 सितंबर की रात शराब पीने के दौरान विवाद हुआ, जिसके बाद आरोपी ने मृतक और उसके दो दोस्तों के साथ मारपीट की। मृतक के दोनों दोस्त मौके से भाग निकले, जबकि आरोपी ने पीछा कर उसे पकड़ लिया और बेल्ट से गला दबाकर उसकी हत्या कर दी। बाद में शव को ईको कार से जंगल में ले जाकर फेंक दिया गया।

गणेश विसर्जन के लिए निकला था युवक

पुलिस के मुताबिक 24 सितंबर को प्रेमलाल कोल निवासी सिवनी डोंगरी टोला, थाना जैतहरी ने अपने 22 वर्षीय पुत्र गोवर्धन कोल के लापता होने की रिपोर्ट दर्ज कराई थी। परिजनों के अनुसार गोवर्धन 23 सितंबर की शाम गणेश विसर्जन के लिए मोटरसाइकिल से घर से निकला था। रात करीब 10 बजे परिजनों को जानकारी मिली कि गोवर्धन के साथ कुछ लोग मारपीट कर रहे हैं। इसके बाद परिजनों ने उसकी तलाश शुरू की। अगले दिन मंडल के बगीचे के पास गोवर्धन की मोटरसाइकिल का टूटा हुआ क्लच केबल और दोनों पैरों की चप्पलें मिलीं। बाइक घटनास्थल से करीब एक किलोमीटर दूर मिली। संदिग्ध परिस्थितियों को देखते हुए पुलिस ने तलाश अभियान तेज किया।

जंगल की झाड़ियों में मिला शव

तलाश के दौरान पुलिस को गोवर्धन का शव बदनहाई डोंगरी सिवनी के जंगल में झाड़ियों के बीच मिला। घटनास्थल का एफएसएल अधिकारियों और डॉग स्क्वॉड की मौजूदगी में निरीक्षण कराया गया। पुलिस ने घटनास्थल की वीडियोग्राफी कराई और नक्शा मौका तैयार किया। शव का पंचनामा बनाकर जैतहरी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में पोस्टमार्टम कराया गया। जांच के दौरान पुलिस ने हत्या और साक्ष्य छिपाने से संबंधित धाराएं बढ़ाईं। मृतक के अनुसूचित जनजाति वर्ग से होने के आधार पर प्रकरण में एससी-एसटी एक्ट की संबंधित धाराएं भी जोड़ी गईं।

शराब पीने के दौरान सामने आई पुरानी बात

पुलिस के अनुसार जांच और पूछताछ में सामने आया कि मृतक के चचेरे भाई तथा मुख्य आरोपी की चचेरी बहन के बीच पूर्व में प्रेम संबंध था। इसी बात को लेकर आरोपी के मन में रंजिश थी। 23 सितंबर की रात मृतक अपने दो दोस्तों और आरोपी के साथ बैठकर शराब पी रहा था। इसी दौरान पुरानी बात को लेकर चर्चा शुरू हुई और विवाद बढ़ गया। आरोप है कि विवाद के बाद आरोपी ने बेल्ट से तीनों युवकों के साथ मारपीट की। इस दौरान मृतक के दोनों दोस्त मौके से भाग निकले। गोवर्धन भी मोटरसाइकिल से वहां से निकलने लगा, लेकिन आरोपी ने उसका पीछा कर मंडल के बगीचे के पास उसे पकड़ लिया। पुलिस के मुताबिक आरोपी ने बेल्ट से उसका गला दबा दिया, जिससे उसकी मौत हो गई। पुलिस के अनुसार वारदात के बाद आरोपी ने अपने पिता को फोन कर घटना की जानकारी दी। इसके बाद आरोपी का पिता ईको कार लेकर मौके पर पहुंचा। शव को कार में रखने के बाद उसे साक्ष्य छिपाने के उद्देश्य से जंगल में ले जाकर फेंक दिया गया।

पांच आरोपी गिरफ्तार, सामग्री जब्त

मामले की जांच के दौरान पुलिस ने सूरज राठौर, राहुल सिंह राठौर, तेजराज राठौर, दिनेश गोड और राहुल राठौर, सभी निवासी सिवनी को हिरासत में लेकर पूछताछ की। पुलिस के अनुसार पूछताछ में आरोपियों ने वारदात में शामिल होना स्वीकार किया। आरोपियों की निशानदेही पर पुलिस ने कथित तौर पर घटना में प्रयुक्त आला-जरब, घटना के समय पहने गए कपड़े, मोटरसाइकिल, ईको कार और मृतक का पर्स सहित अन्य सामग्री जब्त की है। सभी आरोपियों को विधिवत गिरफ्तार कर न्यायिक रिमांड के लिए न्यायालय अनूपपुर में पेश किया गया। पुलिस के अनुसार मामले की विवेचना जारी है। कार्रवाई में थाना प्रभारी निरीक्षक गोकुलानंद पाण्डेय, चौकी प्रभारी उनि प्रवीण साहू, उपनिरीक्षक अमरलाल यादव, सुरेश अहिरवार, जेपीएच तिर्की, सहायक उपनिरीक्षक मणिराज सिंह, सुरेश कुमार कोरी, जयसिंह, श्रीश्याम शुक्ला सहित पुलिस बल की महत्वपूर्ण भूमिका रही।

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