कोतमा में दर्दनाक हादसा, तीन की मौत से पसरा मातम
अनूपपुर/कोतमा। मध्य प्रदेश के अनूपपुर जिले के कोतमा नगर में बस स्टैंड के सामने शनिवार को एक लॉज का भवन भरभराकर गिर गया। इस दर्दनाक हादसे में जीजा-साले समेत तीन लोगों की मौत हो गई, जबकि तीन अन्य घायल हो गए हैं, जिनका इलाज जारी है। घटना के बाद पूरे इलाके में शोक और दहशत का माहौल है।
मलबा हटाते वक्त मिली पिता की मौत की खबर
हादसे ने कई परिवारों को गहरा जख्म दिया
है। 55 वर्षीय हेमराज यादव उस वक्त राहत-बचाव
कार्य में लगे थे और जेसीबी से मलबा हटा रहे थे। तभी उन्हें अस्पताल से फोन आया कि
मलबे में मिले शवों में उनके पिता हनुमानदीन यादव भी शामिल हैं। हेमराज की आवाज
भर्रा जाती है जब वे बताते हैं सुबह पिताजी ने कहा था कि गांव में महुआ बीन रहा
हूं, काम पर नहीं जाऊंगा। लेकिन शाम को पता
चला कि वे उसी लॉज में काम कर रहे थे और मलबे में दब गए।
परिवार का सहारा थे हनुमानदीन
हनुमानदीन यादव खेती-बाड़ी के साथ राजमिस्त्री का काम करते थे। वे अनूपपुर मुख्यालय से करीब 15 किलोमीटर दूर लोढ़ी गांव के रहने वाले थे और रोजाना काम के लिए कोतमा आते-जाते थे। परिवार में दो बेटे और एक बेटी हैं। पत्नी का निधन 19 साल पहले हो चुका था। ऐसे में परिवार की जिम्मेदारी उन्हीं के कंधों पर थी।
साइकिल से 22 किमी आकर मजदूरी करता था बेटा
इस हादसे में हनुमानदीन के साले 40
वर्षीय रामकृपाल यादव की भी मौत हो गई। वे बेहद गरीब परिवार से
थे और रोजाना 22 किलोमीटर साइकिल चलाकर मजदूरी करने आते
थे। उनके बेटे दुर्गेश यादव ने बताया कि पिताजी ही घर के अकेले कमाने वाले थे। रोज
300 रुपए कमाते थे। उस दिन भी सुबह काम पर
गए थे और बोले थे कि आज पेमेंट मिलेगा, देर
हो जाएगी… लेकिन वे कभी वापस नहीं आए। दुर्गेश ने
बताया कि परिवार पहले से कर्ज में डूबा है और अब घर चलाना मुश्किल हो गया है।
प्रशासन की ओर से मिली आर्थिक सहायता जरूरत के मुकाबले बहुत कम है।
मां को ढूंढता रहा बेटा, अगले दिन मिला शव
हादसे में 45 वर्षीय
राधाबाई कोल की भी मौत हो गई। उनका शव अगले दिन मलबे से निकाला गया।
राधाबाई का इकलौता बेटा आकाश मलबे के पास बैठा पूरी रात अपनी
मां को ढूंढता रहा। आकाश ने रोते हुए कहा मां कहती थीं बेटा, शादी कब करेगा… बहू कब घर लाएगा… अब
वो ही नहीं रहीं। राधाबाई मजदूरी करके बेटे का पालन-पोषण कर रही थीं। पति का पहले
ही निधन हो चुका था।
तीन की मौत, तीन घायल
इस हादसे में कुल तीन लोगों की मौत हुई है, जबकि तीन अन्य घायल हुए हैं। घायलों का इलाज अस्पताल में जारी है। रविवार को तीनों मृतकों का अंतिम संस्कार किया गया। स्थानीय लोगों ने भवन निर्माण में लापरवाही का आरोप लगाया है। लोगों का कहना है कि यदि समय रहते जांच और निगरानी होती, तो यह हादसा टाला जा सकता था। प्रशासन की ओर से मामले की जांच की बात कही गई है।
इलाके में शोक और आक्रोश
इस घटना ने कई परिवारों को हमेशा के लिए तोड़ दिया। अपनों को खोने का दर्द और आर्थिक संकट दोनों एक साथ सामने खड़े हैं। पूरा कोतमा नगर गमगीन है और हर आंख नम है। लोग दोषियों पर सख्त कार्रवाई और पीड़ित परिवारों को पर्याप्त मुआवजा देने की मांग कर रहे हैं।






