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विकास को छोड अनूपपुर हुआ शौच मग्न - अमित शुक्ला की कलम से.........

शनिवार, 2 जून 2018

/ by News Anuppur
अनूपपुर। कहते है खुले मे शौचमुक्त करने के लिए सोच बदलनी पड़ती है, लेकिन बिना साधन व संसाधन के यह संभव नही। हकीकत में जहां केन्द्र व प्रदेश शासन की कई महत्वपूर्ण योजना आदिवासी क्षेत्रो में पहुंचते-पहुंचते जमीदोज हो जाती है वहां शिक्षित व्यक्ति भी गरीबी और बेरोजगारी के कारण अज्ञानी होता जा रहा है। जिस जिले में अपात्र योजनाओं का लाभ ले रहे और पात्र योजनाओं का लाभ लेने शासकीय कार्यालयों के चक्कर काट काट रहे है। वहां आज जिला प्रशासन की नजर में जिले का विकास सिर्फ जिले को खुले में शौच से मुक्त कराना अन्य विकास कार्यो से ज्यादा महत्वपूर्ण नजर आ रहा है, जहां नवागत कलेक्टर ने जिले में आते ही समस्त विभागो को खुले में शौचमुक्त अभियान में जोड उसे प्राथमिकता देते हुए लगातार 21 मई से संयुक्त कलेक्ट्रेट सभागार तथा जिला पंचायत में अनेको बैठके कर जिले के समस्त अधिकारियो की इस अभियान में तैनात करने उत्तरदायित्व सौंप गया है। नवागत कलेक्टर के आने के बाद केन्द्र व प्रदेश शासन के अन्य कल्याणकारी योजनाओं के बारे में इतनी चर्चा नही की गई होगी जितनी खुले में शौचमुक्त करने की अब तक की गई है। अब जिले के समस्त अधिकारी कर्मचारी भी अपने विभाग के महत्वपूर्ण कार्यो को छोड़ सिर्फ शौच-शौच की रट लगाए हुए है, जिससे पूरा जिला शौच मग्न हो गया है। एैसा लग रहा है जैसे तत्कालीन कलेक्टर अजय शर्मा के स्थानांतरण का कारण इसी लक्ष्य को ना पाने के कारण हुआ और मैडम इसी डर से उस लक्ष्य को शत-प्रतिशत पाने के लिए जिले के समस्त विभागो के जिलाधिकारियो को इस कार्य में लगा दी है, जो अब अपने विभाग के महत्पूर्ण कार्यो को छोड सिर्फ जिले को खुले में शौच से मुक्त कराएगें। जबकि अब तक लक्ष्य के पीछे रह जाने के कारणो पर किसी तरह की जमीनी स्तर पर पहुंचकर समीक्षा नही की की सकी गई है। इसके लिए न तो ग्रामीणो से ग्रामो में संपर्क कर शौच का उपयोग नही किए जाने का कारण नही पूछा गया बस ग्रामीणो को जागरूक करने के अभियान का पाठ अधिकारियों एवं कर्मचारियों को रटाया जा रहा है। एक तरफ जिले के चारो जनपदो अंतर्गत आने वाले 282 ग्राम पंचायत के सचिवो एवं सरपंचो द्वारा जहां शौचालय निर्माण में भारी अनियमितता की गई, जिसमें कई ग्रामीणो के पास आज भी शौचालय नही है, तो कई आज भी अधूरे पड़े है तो कुछ शौचालय अनुपयोगी है तो कुछ कागजो पर बने हुए है। लेकिन अब तक की बैठको में ग्रामीणो द्वारा शौचालय का इस्तेमाल नही किए जाने का कारण पानी तो कहीं शौक बताया जा रहा है, जहां अब जिले के अधिकारी ग्रामीणो को बिना शौचालय, कागजो में बने शौचालय तथा अनुपयोगी शौचालय के इस्तेमाल किए जाने के लिए जबरन प्रोत्साहित करेगे या फिर यूं कहे तो दवाब बनाएगे। जिसके बाद अभियान कितना कारगार साबित होगा यह तो अभियान के प्रारंभ होने के बाद ही पता चलेगा। एक ओर अनूपपुर जिला वर्ष 2003 में शहडोल जिले से अलग होने के बाद अपने विकास के लिए जद्दोजहद कर रहा है। वहीं लगभग 7.5 लाख की आबादी वाले इस जिले को निर्मल व स्वच्छ बनाने का अभियान जिला प्रशासन  के लिए जितना आवश्यक है। उतना ही जिले के हर क्षेत्रो में अन्य विकास की जरूरत भी अपनी अह्म भूमिका रखती है। हर विकास कार्यो का शत-प्रतिशत परिणाम पाने के लिए जिले का विकास होना आवश्यक है, जिसके बाद अनूपपुर जिला स्वयं ही खुले में शौचमुक्त होने का शत-प्रतिशत लक्ष्य हासिल कर लेगा।


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