ताप विद्युत परियोजना पर ग्रामीणों की शर्तें, वायु-जल और भूमि की सुरक्षा अनिवार्य
इंट्रो- विकास
की आवश्यकता और पर्यावरण की जिम्मेदारी के बीच संतुलन तलाशते हुए रक्सा–कोलमी क्षेत्र में प्रस्तावित 2×800 मेगावाट
ताप विद्युत परियोजना को लेकर लोक सुनवाई आयोजित की गई। बैठक में ग्रामीणों,
प्रशासन और कंपनी के बीच हुए संवाद में जहाँ रोजगार और विकास
की उम्मीदें सामने आईं, वहीं वायु, जल
और भूमि संरक्षण को लेकर गंभीर चिंताएँ भी प्रमुखता से उठीं।
अनूपपुर। अनूपपुर जिले के रक्सा–कोलमी क्षेत्र में न्यू-जोन इंडिया प्राइवेट लिमिटेड (टोरंट पावर लिमिटेड की अनुषंगी कंपनी) द्वारा प्रस्तावित 2×800 मेगावाट क्षमता वाली कोयला आधारित अल्ट्रा सुपर क्रिटिकल ताप विद्युत परियोजना के लिए पर्यावरणीय स्वीकृति हेतु बुधवार 7 जनवरी को रक्सा खेल मैदान में लोक सुनवाई आयोजित की गई। यह कार्यक्रम मध्य प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, शहडोल के तत्वावधान में शांतिपूर्ण और सुव्यवस्थित ढंग से सम्पन्न हुआ। लोक सुनवाई में क्षेत्र के ग्रामीणों, जनप्रतिनिधियों, प्रशासनिक अधिकारियों और मीडिया की उपस्थिति रही। ग्राम रक्सा की सरपंच उमा सिंह और ग्राम कोलमी के सरपंच राजू पनिका ने अपनी-अपनी ग्राम सभाओं की ओर से लिखित प्रस्ताव प्रस्तुत कर परियोजना के पक्ष में समर्थन व्यक्त किया। वहीं ग्रामीण वक्ताओं चक्रधर मिश्रा, अमोल सिंह मरकाम, आदित्य राठौर, नरेंद्र राठौर और छत्रधारी राठौर ने विकास और रोजगार की संभावनाओं के बावजूद परियोजना से जुड़ी गंभीर चिंताओं को भी जोर-शोर से उठाया। उन्होंने विशेष रूप से जमीन अधिग्रहण की पारदर्शिता, विस्थापन की अनिश्चितता, मुआवजे की न्यायसंगत व्यवस्था, कृषि भूमि और जल स्रोतों पर दीर्घकालिक प्रभाव, वायु प्रदूषण, फ्लाई ऐश निपटान और स्थानीय स्वास्थ्य जोखिम जैसे मुद्दों पर तीखे सवाल पूछे।
अपर कलेक्टर दिलीप कुमार पांडे की अध्यक्षता में आयोजित इस सुनवाई में मध्य प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारी डॉ. अशोक तिवारी और कंपनी के कंसल्टेंट ग्रीन सी इंडिया प्राइवेट लिमिटेड की प्रतिनिधि नंदनी ने ईआईए (पर्यावरणीय प्रभाव आकलन) की प्रमुख बातें साझा कीं। अधिकारियों ने ग्रामीणों द्वारा उठाई गई सभी आशंकाओं को गंभीरता से सुना और अभिलेखित किया। कंपनी प्रतिनिधियों ने परियोजना में अत्याधुनिक वायु प्रदूषण नियंत्रण प्रणाली, फ्ल्यू गैस डिसल्फराइजेशन, इलेक्ट्रोस्टैटिक प्रीसिपिटेटर, वैज्ञानिक जल प्रबंधन, जीरो लिक्विड डिस्चार्ज नीति, फ्लाई ऐश का सुरक्षित निपटान और हरित पट्टी का विकास सुनिश्चित करने का आश्वासन दिया।
ग्रामीणों ने मांग की कि जल स्रोतों की सुरक्षा, स्वच्छ हवा और पेयजल की उपलब्धता, कृषि और वन क्षेत्रों पर न्यूनतम
प्रभाव सुनिश्चित
करने के लिए कंपनी समय-समय पर सार्वजनिक रिपोर्ट जारी करे और स्थानीय प्रतिनिधियों
को निगरानी प्रक्रिया में शामिल करे। कंपनी ने इसके साथ ही स्थानीय युवाओं को प्राथमिक रोजगार, स्वास्थ्य, शिक्षा, कौशल विकास और पर्यावरण संरक्षण से
जुड़े दीर्घकालिक सीएसआर प्रोजेक्ट का वचन भी दोहराया।
लोक सुनवाई में प्रशासनिक संतुलन, ग्रामीणों की तीखी आपत्तियाँ और परियोजना के पक्ष में समर्थन को ध्यान में रखते हुए यह आयोजन अनूपपुर जिले में ऊर्जा सुरक्षा, रोजगार सृजन और पर्यावरण-संवेदनशील औद्योगिक विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।


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