छोटी कार्रवाई से आगे कब बढ़ेगा अभियान? बड़े नेटवर्क पर शिकंजा कसने की जरूरत
अनूपपुर। जिले में आपराधिक और अवैध गतिविधियों पर
पूरी तरह अंकुश लगता नजर नहीं आ रहा है। पशु क्रूरता, गांजा
तस्करी, नशीली दवाओं की खेप और जुआ फड़ों के
संचालन जैसी गतिविधियां पुलिस के लिए चुनौती बनी हुई हैं। स्थानीय स्तर पर आरोप
लगाए जा रहे हैं कि कुछ थाना क्षेत्रों में छोटी-मोटी कार्रवाई तक सीमित रहकर महज
कागजी खानापूर्ति की जा रही है, जबकि बड़े स्तर पर संचालित कथित अवैध
कारोबार के खिलाफ अपेक्षित प्रभावी कार्रवाई नजर नहीं आ रही है। सबसे अधिक सवाल गांजा तस्करी के नेटवर्क और पुलिस की निगरानी व्यवस्था को लेकर उठ रहे हैं। ओडिशा से छत्तीसगढ़
के रास्ते गांजे की खेप अनूपपुर जिले में पहुंचती है और यहां से शहडोल, सतना, रीवा, जबलपुर,
सीधी, सिंगरौली सहित अन्य जिलों तक सप्लाई किए
जाने की बात कही जा रही है।
वर्ष 2026 में ना मात्र की कार्यवाही
उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2023 में पुलिस ने 1,716.191 किलो गांजा जब्त किया था। वहीं वर्ष 2024 में 136.294 किलो गांजा जब्त किए जाने की जानकारी सामने आई है। वर्ष 2022 में भी करीब एक टन गांजा जब्त किए जाने का दावा किया गया था। इन आंकड़ों के बीच अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि वर्ष 2026 में ना मात्र की कार्यवाही साथ ही 19 मई के बाद जिले में गांजा तस्करी के खिलाफ कितनी कार्रवाई हुई? कितनी मात्रा में गांजा जब्त किया गया, कितने आरोपी गिरफ्तार हुए और कितने वाहनों को जब्त किया गया। इन तमाम बिंदुओं पर पुलिस की ओर से विस्तृत जानकारी सामने आना बाकी है।
कार्यवाही करने बचते पुलिस अधिकारी
बताया जाता है कि गांजे की खेप जिले के जैतहरी, भालूमाड़ा, कोतमा, रामनगर, राजेन्द्रग्राम और करनपठार सहित अन्य पुलिस चौकियों से होकर आगे निकलने की चर्चा है। यदि इन मार्गों का इस्तेमाल तस्करी के लिए किया जा रहा है तो पुलिस की जांच और निगरानी व्यवस्था पर सवाल उठना स्वाभाविक है। सवाल यह भी है कि पुलिस के पास तस्करों के खिलाफ कार्रवाई के लिए पर्याप्त सूचना तंत्र नहीं है या फिर उपलब्ध सूचनाओं पर अपेक्षित गंभीरता से कार्रवाई नहीं हो रही है। तस्करी के नेटवर्क को केवल वाहन और माल की जब्ती तक सीमित रखने के बजाय इसके पीछे सक्रिय लोगों और नेटवर्क तक पहुंचने में असहज क्यो महसूस हो रही है।

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