प्रमुख चौराहों पर यातायात जवान नदारद, ऑटो-हाथठेलों से जाम, नो-एंट्री व्यवस्था पर गंभीर सवाल
अनूपपुर। शहर की यातायात व्यवस्था को सुचारु रखने की जिम्मेदारी यातायात पुलिस की है, लेकिन अनूपपुर शहर में जमीनी तस्वीर इसके उलट नजर आने के आरोप हैं। शहर के प्रमुख चौराहों पर आए दिन जाम, बेतरतीब खड़े ऑटो और हाथठेले तथा यातायात पुलिस की कथित गैरमौजूदगी को लेकर आमजन में नाराजगी बढ़ती जा रही है। यातायात थाना प्रभारी विनोद दुबे के कार्यकाल के दौरान यातायात व्यवस्था के पूरी तरह से बेपटरी हो चुकी हैं। शहर के सामतपुर तिराहा, बस स्टैंड, स्टेशन तिराहा, इंदिरा तिराहा और अमरकंटक तिराहा जैसे व्यस्ततम स्थानों पर यातायात पुलिस के जवान नियमित रूप से व्यवस्था संभालने में नाकाम है।
फुनगा हाईवे चौकी बंद होने से सुरक्षा पर बड़ा सवाल
शहडोल-मनेन्द्रगढ़ हाईवे पर स्थित यातायात हाईवे चौकी फुनगा को सड़क सुरक्षा और दुर्घटनाओं की स्थिति में त्वरित सहायता एवं प्रशासनीक व्यवस्था में सुधार के उद्देश्य से पुलिस मुख्यालय भोपाल द्वारा संचालित किया गया था। लेकिन चौकी में तैनात बल को यातायात थाना से संबद्ध कर दिया गया, जिसके कारण हाईवे चौकी बिना कर्मचारियों के है, जबकि चौकी खोलने का कारण हाइवे में होने वाली दुर्घटनाओं पर तत्काल सहायता उपलब्ध कराना था। स्थानीय लोगों का कहना है कि चौकी संचालित रहने के दौरान दुर्घटना की स्थिति में पुलिस बल तत्काल मौके पर पहुंचकर सहायता उपलब्ध कराता था। अब बल हटने के बाद दुर्घटना की स्थिति में त्वरित प्रतिक्रिया को लेकर चिंता बढ़ गई है।
यातायात थाना का बढ़ा बल, फिर भी व्यवस्था जस की तस
बताया गया है कि पुलिस अधीक्षक द्वारा बल की कमी को देखते हुए यातायात हाईवे चौकी फुनगा में तैनात बल को भी यातायात थाना से संबद्ध किया गया। इसके बावजूद शहर की यातायात व्यवस्था में अपेक्षित सुधार दिखाई नहीं दे रहा है। सवाल यह भी उठ रहा है कि जब यातायात पुलिस के पास अतिरिक्त बल उपलब्ध कराया गया है, तो शहर के प्रमुख चौराहों पर यातायात नियंत्रण के लिए पर्याप्त जवान क्यों नहीं दिखाई देते?
नो-एंट्री के नियमों पर भी सवाल
अनूपपुर शहर में दुर्घटनाओं की रोकथाम के उद्देश्य से सुबह 6 बजे से रात 10 बजे तक भारी वाहनों
के प्रवेश पर नो-एंट्री लागू
होने की बात कही गई है। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि इस व्यवस्था का प्रभावी
ढंग से पालन नहीं कराया जा रहा है और कुछ भारी वाहनों को कथित रूप से नियमों से
छूट देकर शहर में प्रवेश कराया जाता है। जिससे पूरे शहर की व्यवस्था पूरी तरह से
बेतरतीब हो चुकी है।
हाईवे पर ड्यूटी या वसूली?
यातायात पुलिस के कुछ जवानों को शहर की यातायात व्यवस्था के
बजाय सरई रोड,
पेंड्रा रोड और शहडोल-मनेन्द्रगढ़ मार्ग,
जैतहरी-वेंकटनगर मार्ग पर लंबे समय तक तैनात देखे जाते है। सुबह करीब 8 बजे से देर रात तक दो टीमों के माध्यम से वाहनों की चेकिंग के
नाम पर हाईवे में इनके द्वारा ऐसी कौन सी जांच की जाती है, जो शहर की यातायात व्यवस्था को यातायात पुलिस
द्वारा दरकिनार कर दिया जाता है। जानकारी के अनुसार यातायात थाना प्रभारी के कुछ
चुनिंदा जवानों के माध्यम से यह पूरा तंत्र संचालित किया जा रहा है।
मंथली टोकन से चल रहा यातायात विभाग
सबसे गंभीर आरोप यह है कि शहर से गुजरने वाले भारी एवं मध्यम मालवाहक वाहन, यात्री बस, स्कूली बस और ऑटो से प्रतिमाह तक की मंथली वसूली के नाम पर टोकन काटे जाते है। इस टोकन से भारी ओव्हरलोड़ वाहन को एक माह तक छूट दी जाती है। जो वाहन चालक या मालिक टोकन नहीं लेता, उन्हें कार्रवाई के नाम पर परेशान किया जाता है।
कानून व्यवस्था के नाम पर निजी वाहन अधिग्रहण
जिले की यातायात व्यवस्था के नाम यातायात प्रभारी कानून
व्यवस्था के नाम पर निजी वाहनों का अधिग्रहण कर उनका उपयोग हाईवे पर चेकिंग और
वसूली संबंधी गतिविधियों में किया जाता है। यह जांच का विषय है कि निजी वाहनों के
अधिग्रहण के लिए किस आदेश या वैधानिक प्रक्रिया का पालन किया जा रहा है और उनका
वास्तविक उपयोग किस उद्देश्य से किया जा रहा है।
सबसे बड़ा सवाल—शहर संभालेगा कौन?
अनूपपुर शहर में यदि प्रमुख चौराहों पर नियमित यातायात ड्यूटी नहीं लग रही, नो-एंट्री प्रभावी नहीं है और यातायात बल का बड़ा हिस्सा हाईवे पर तैनात है, तो शहर की यातायात व्यवस्था की जिम्मेदारी कौन संभाल रहा है? आम नागरिकों के लिए यह सिर्फ जाम का सवाल नहीं है। यह सड़क सुरक्षा, दुर्घटना रोकथाम और पुलिस व्यवस्था पर सवाल है। आये दिन नो इंट्री के समय भारी वाहनों का प्रवेश, शहर की यातायात व्यवस्था की पोल, जाम की स्थिति वाली वीडियो सोशल मीडिया में वॉयरल होती है, बावजूद इसके वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा सब कुछ जानते हुए यातायात की अव्यवस्था के नाम पर चुप्पी साध अपनी जिम्मेदारी से पीछा छुड़ाने में लगे हुए है।


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