भौतिक
सत्यापन में 8 बैलेट और 16
कंट्रोल
यूनिट मिलीं कम, पुराने तहसील भवन से
हटाते समय खुला मामला
अनूपपुर। जिला मुख्यालय स्थित पुराने तहसील
कार्यालय के पीछे बने ईवीएम वेयरहाउस की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े
हो गए हैं। यहां सुरक्षित रखी गई ईवीएम मशीनों में से 24 मशीनें गायब मिलने के बाद मामला पुलिस तक पहुंच गया है। मामले
में 30 सितम्बर को प्राथमिक विद्यालय सीतापुर के सहायक शिक्षक फूल
सिंह पिता धना सिंह निवासी कर्राटोला ने तहसीलदार अनूपपुर वेद प्रकाश सिंह तथा प्राथमिक विद्यालय बस्ती के सहायक शिक्षक संजय निगम के साथ कोतवाली पहुंच शिकायत दर्ज कराई।
जिसके आधार पर कोतवाली पुलिस ने अज्ञात व्यक्ति के खिलाफ बीएनएस
की धारा 331(4) और 305(ए) के तहत प्रकरण दर्ज कर जांच शुरू की गई
है। मामला उस समय सामने आया, जब पुराने तहसील भवन क्षतिग्रस्त होने के
कारण उसे डिसमेंटल कराया जा रहा था। इस दौरान ईवीएम मशीनों को पॉलीटेक्निक महाविद्यालय
में संचालित तहसील कार्यालय के कक्ष पर स्थानांतरित करने की कार्रवाई की जा रही
थी। इसी दौरान संबंधित पुराने तहसील कार्यालय भवन के पीछे बने ईव्हीएम वेयर हाउस भवन
की दीवार क्षतिग्रस्त मिली। इसके बाद मशीनों का भौतिक सत्यापन कराया गया तो रिकॉर्ड
और मौके पर उपलब्ध मशीनों की संख्या में अंतर सामने आया।
24 मशीनों का नहीं मिला
कोई सुराग
शिकायत के अनुसार भौतिक सत्यापन के दौरान कुल 24 ईवीएम मशीनें कम पाई गईं। इनमें 8 बैलेट यूनिट (बीयू) और 16 कंट्रोल यूनिट (सीयू) शामिल हैं। मशीनों के सीरियल नंबर भी शिकायत में दर्ज किए गए हैं, जिससे पुलिस जांच में इनके रिकॉर्ड, आवंटन और संभावित आवाजाही की जानकारी जुटाने में मदद मिल सकती है। मामले की गंभीरता इस बात से भी समझी जा सकती है कि ये मशीनें निर्वाचन प्रक्रिया से संबंधित महत्वपूर्ण सरकारी सामग्री हैं। ऐसे में इनके रिकॉर्ड से गायब होने का मामला सामने आने के बाद संबंधित अधिकारियों और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सवाल उठना स्वाभाविक है।
2014 के पंचायत चुनाव के
बाद से सुरक्षित थीं मशीनें
शिकायत में बताया गया है कि वर्ष 2014 में स्थानीय निर्वाचन यानी पंचायत चुनाव के लिए अनूपपुर के पुराने तहसील कार्यालय में बड़ी संख्या में ईवीएम मशीनें सुरक्षित रखी गई थीं। रिकॉर्ड के मुताबिक वहां 620 कंट्रोल यूनिट और 1670 बैलेट यूनिट रखी गई थीं। मशीनों को पुराने तहसील भवन के पीछे बने वेयरहाउस में सुरक्षित रखा गया था। लंबे समय तक मशीनें इसी परिसर में रखी रहीं। भवन की हालत खराब होने के बाद जब इन्हें वहां से हटाने की प्रक्रिया शुरू हुई, तभी वेयरहाउस की स्थिति और मशीनों के रिकॉर्ड का भौतिक मिलान किया गया।
दीवार क्षतिग्रस्त मिलने पर उठे चोरी के सवाल
शिकायत के मुताबिक 16 मार्च को पुराने तहसील भवन से ईवीएम मशीनों को हटाने की कार्रवाई के दौरान संबंधित कमरे के पीछे की दीवार क्षतिग्रस्त मिली। दीवार की स्थिति सामने आने के बाद वहां रखी मशीनों की सुरक्षा और उपलब्धता को लेकर जांच की गई। इसके बाद ईवीएम मशीनों को पुराने भवन से हटाकर वर्तमान में पॉलीटेक्निक महाविद्यालय अनूपपुर में संचालित तहसील कार्यालय के भूतल स्थित कक्ष क्रमांक 6 में 21 सितंबर को रखा गया। मशीनों को नए स्थान पर रखने के बाद 24 सितंबर से 28 सितंबर 2026 के बीच भौतिक सत्यापन कराया गया। इसी सत्यापन में रिकॉर्ड में दर्ज मशीनों और मौके पर उपलब्ध मशीनों के बीच अंतर सामने आया और 24 मशीनें कम मिलीं।
ईव्हीएम वेयरहाउस की सुरक्षा पर सवाल
ईवीएम जैसी संवेदनशील निर्वाचन सामग्री लंबे समय तक जिस भवन में सुरक्षित रखी गई, वहां से मशीनों का गायब होना अपने आप में कई सवाल खड़े करता है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि मशीनें कब गायब हुईं और इसकी जानकारी इतने समय बाद कैसे सामने आई? इसके अलावा पुराने वेयरहाउस की सुरक्षा व्यवस्था कैसी थी, वहां प्रवेश और निकासी का रिकॉर्ड रखा जाता था या नहीं, कमरे की निगरानी किसके जिम्मे थी। चूंकि मशीनें वर्ष 2014 से संबंधित रिकॉर्ड का हिस्सा बताई गई हैं, इसलिए जांच का दायरा केवल चोरी की घटना तक सीमित न रहकर मशीनों के भंडारण, सुरक्षा, रिकॉर्ड संधारण और स्थानांतरण की पूरी प्रक्रिया तक जा सकता है।
सीरियल नंबर से खुलेगा मशीनों का पूरा ट्रैक
गायब हुई 8 बैलेट यूनिट और 16 कंट्रोल यूनिट के सीरियल नंबर शिकायत में दर्ज होने से जांच के
दौरान इनके रिकॉर्ड का मिलान किया जा सकता है। पुलिस और संबंधित विभाग यह पता
लगाने का प्रयास कर सकते हैं कि मशीनें अंतिम बार कब सत्यापित हुई थीं, किस रिकॉर्ड में दर्ज थीं और पुराने वेयरहाउस में उनके रखे
होने की पुष्टि कब हुई थी। मामले में अब यह भी महत्वपूर्ण होगा कि जांच एजेंसी
पुराने तहसील भवन के वेयरहाउस से संबंधित उपलब्ध रिकॉर्ड, निरीक्षण
रिपोर्ट, सुरक्षा व्यवस्था और स्थानांतरण से
जुड़े दस्तावेजों की जांच करे।
एफआईआर के बाद कई सवालों के जवाब तलाशेगी जांच
कोतवाली पुलिस ने शिकायत के आधार पर अज्ञात के खिलाफ प्रकरण
दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। अब जांच में यह स्पष्ट होना बाकी है कि 24 ईवीएम मशीनें वास्तव में कब गायब हुईं, क्या
इन्हें चोरी कर बाहर ले जाया गया या रिकॉर्ड और भौतिक उपलब्धता के बीच किसी अन्य
कारण से अंतर आया। फिलहाल 24 ईवीएम मशीनों के
गायब होने और पुराने क्षतिग्रस्त तहसील भवन अनूपपुर के डिसमेंटल किेये जाने के कार्य
आदेश के बाद भी ईव्हीएम वेयर हाउस से ईव्हीएम को पहले क्यो नही हटाया गया। जिस पर
जिला प्रशासन पर निर्वाचन सामग्री की सुरक्षा और रिकॉर्ड
व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। पुलिस जांच और संबंधित विभाग के
रिकॉर्ड की पड़ताल के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि इन मशीनों के गायब होने के
पीछे वास्तविक घटनाक्रम क्या रहा।
इनका कहना है
शिकायत मिलने और मामले की गंभीरता को देखते हुए तत्काल एफआईआर
दर्ज कर मामले की जांच शुरू कर दी गई है।

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