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Anuppur: यातायात विभाग की कार्यप्रणाली से बदनाम हो रहा अनूपपुर जिला

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शनिवार, 3 अक्टूबर 2026

/ by News Anuppur


नो-एंट्री में भारी वाहनों की आवाजाही से अनूपपुर की यातायात व्यवस्था सवालों के घेरे में

प्रभारी अक्षमता से व्यवस्था चौपट, नो-एंट्री के पालन और इंट्री वसूली बनी फजीहत

अनूपपुर। जिला मुख्यालय अनूपपुर की यातायात व्यवस्था एक बार फिर सवालों के घेरे में है। शहर में निर्धारित नो-एंट्री व्यवस्था के बावजूद भारी वाहनों की आवाजाही, हाइवें वा मुख्‍य मार्गो में इंट्री वसूली रूकने के नाम नही ले रही है। जिसके कारण प्रमुख मार्गों और शहर के व्यस्त हिस्सों में यातायात का दबाव बढ़ने के साथ जाम की स्थिति निर्मित होने और दुर्घटनाओं की आशंका भी बनी हुई है। जिसके बाद जाम की स्थिति को संभालने के लिय कई बार कोतवाली पुलिस को सामने आना पड़ा है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर कार शहर में यातायात व्‍यवस्‍था को बनाये रखने के लिये चौक चौराहो में बनाये गये प्‍वांइट से यातायात बल कहां गायब हो जाती है। यातायात प्रभारी विनोद दुबे जिला मुख्‍यालय की यातायात व्यवस्था को नियंत्रित करने में पूरी तरह से नाकाम है। जनचर्चा है कि यातायात अमले की प्राथमिकता शहर की यातायात व्यवस्था को सुचारु बनाना है या फिर वाहन जांच और चालानी कार्रवाई सहित वाहनों से इंट्री वसूलने तक सीमित है।

बदनाम हो रहा अनूपपुर जिला

यातायात विभाग की निष्क्रियता के साथ ही अनूपपुर जिला हाईवे पर कथित इंट्री वसूली को लेकर भी बदनाम हो रहा है। शहर के प्रवेश द्वारों से लेकर हाईवे तक भारी वाहनों की आवाजाही के बीच यातायात अमले की मौजूदगी को लेकर लोगो में तरह-तरह की चर्चाएं हैं। जिले से होकर गुजरने वाले वाहन चालकों तथा लोगो का कहना है कि प्रदेश के अन्य जिलों में हाईवे पर यातायात पुलिस की मौजूदगी कम ही दिखाई देती है, लेकिन अनूपपुर जिले की सीमा में प्रवेश करते ही हाईवे पर यातायात अमला सक्रिय नजर आता है। यहां इंट्री के नाम पर वसूली की जाती है, जो प्रदेश भरमें अनूपपुर जिले की छवि बदनाम हो रही हैं।


नो-एंट्री व्यवस्था पर सबसे बड़ा सवाल

अनूपपुर जिला मुख्यालय में भारी वाहनों के प्रवेश को नियंत्रित करने के लिए नो-एंट्री व्यवस्था बनाई गई है। इसका उद्देश्य शहर के अंदर यातायात का दबाव कम करना और आम नागरिकों को जाम तथा दुर्घटनाओं के जोखिम से राहत देना है। लेकिन यदि प्रतिबंधित समय में भी भारी वाहन शहर की सड़कों पर प्रवेश करते हैं तो यह व्यवस्था की प्रभावशीलता पर गंभीर सवाल खड़ा करता है। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि कई बार भारी वाहनों की आवाजाही के कारण छोटे वाहनों, दोपहिया चालकों और पैदल राहगीरों को परेशानी का सामना करना पड़ता है। बाजार क्षेत्र, बस स्‍टैण्‍ड और प्रमुख चौराहों पर वाहनों का दबाव बढ़ने से यातायात की गति प्रभावित होती है। ऐसे में नो-एंट्री के नियमों का सख्ती से पालन क्‍यो नही किया जा रहा है।

इंट्री वसूली में मशगूल यातायात पुलिस

जानकारी के अनुसार यातायात अमले में पदस्‍थ बल जो लगातार कई वर्षो से यातायात थाने में पैर जमाये हुए है, क्‍या इन बलो को सिर्फ यातायात थाने के लिए रिर्जव रखा गया है। अनूपपुर-बिजुरी, अनूपपुर-अमरकंटक, अनूपपुर-वेंकटनगर और अनूपपुर-शहडोल मार्ग शहर के प्रमुख संपर्क मार्ग हैं। इन मार्गों पर यातायात अमले की तैनाती और वाहन जांच की गतिविधियां प्रत्‍येक दिन और हर समय दिखाई देती हैं। इसके बावजूद शहर के भीतर जाम, पार्किंग, भारी वाहनों की आवाजाही और नो-एंट्री के पालन जैसी समस्याएं पूरी तरह नियंत्रित नहीं हो पा रही हैं। यदि प्रमुख मार्गों पर पर्याप्त यातायात बल तैनात है, तो शहर के प्रवेश बिंदुओं पर ही भारी वाहनों की निगरानी क्यों नहीं की जाती? यदि नो-एंट्री का समय निर्धारित है तो उस दौरान प्रवेश करने वाले वाहनों का रिकॉर्ड क्यों नहीं सार्वजनिक किया जाता? वहीं यदि किसी विशेष परिस्थिति में किसी भारी वाहन को प्रवेश की अनुमति दी जाती है तो उसके लिए निर्धारित नियम और प्रक्रिया क्या है, इसकी जानकारी भी सार्वजनिक होनी चाहिए।

चालानी कार्रवाई बनाम यातायात व्यवस्था सुधारने की बहस

स्थानीय स्तर पर यह चर्चा भी सामने आ रही है कि यातायात पुलिस की सक्रियता मुख्य मार्गों पर चालानी कार्रवाई की नाम पर इंट्री वसूलने में अधिक दिखाई देती है, जबकि शहर की मूलभूत यातायात समस्याएं अभी भी बनी हुई हैं। जनचर्चा है कि अनूपपुर से गुजरने वाले मार्गों पर जांच और चालानी कार्रवाई का सामना लोगो को करना पड़ता है। ऐसे में सवाल यह है कि चालानी कार्रवाई के साथ-साथ शहर के यातायात प्रबंधन पर भी उतना ही ध्यान दिया जा रहा है या नहीं। चालानी कार्रवाई स्वयं यातायात नियमों के पालन का हिस्सा है, लेकिन इसके साथ नो-एंट्री, पार्किंग, जाम और भारी वाहनों के प्रवेश जैसे मुद्दों पर भी प्रभावी कार्रवाई अपेक्षित है। लेकिन वाहनो से इंट्री वसूलना यातायात के किन नियमों में आता है।

यातायात प्रभारी की कार्यप्रणाली पर उठ रहे सवाल

यातायात प्रभारी विनोद दुबे की कार्यप्रणाली को लेकर भी स्थानीय स्तर पर सवाल उठाए जा रहे हैं। कुछ नागरिकों और वाहन चालकों का आरोप है कि यातायात अमले की प्राथमिकता वाहन जांच और चालानी कार्रवाई पर अधिक दिखाई देती है, जबकि शहर की यातायात व्यवस्था से जुड़े मूल सवालों का स्थायी समाधान नहीं हो पा रहा है। आये दिन सोशल मीडिया में नो इंट्री के समय भारी वाहनो के प्रवेश, शहर  में ओव्‍हर स्‍पीड़ दौड़ रहे भारी वाहनो का वीडियो हजारों बार सामने आया है। लेकिन यातायात प्रभारी को यातायात के इन नियमों के पालन के लिये गहरी निंद्रा से उठाना अब संभव नही हो पा रहा है।

शहर की सड़कों पर बढ़ रहा यातायात दबाव

अनूपपुर जिला मुख्यालय में लगातार बढ़ती वाहन संख्या के बीच यातायात प्रबंधन की चुनौती भी बढ़ रही है। बाजार क्षेत्रों में पार्किंग की समस्या, सड़क किनारे खड़े वाहन, भारी वाहनों की आवाजाही और व्यस्त चौराहों तिराहो पर यातायात दबाव आम लोगों के लिए परेशानी का कारण बनता जा रहा है। ऐसे में यातायात व्यवस्था को प्रबंधित करने की जरूरत महसूस की जा रही है। प्रवेश और निकास बिंदुओं पर निगरानी, नो-एंट्री के समय का सख्त पालन, पार्किंग व्यवस्था, प्रमुख चौराहों पर प्रभावी तैनाती और नियम तोड़ने वाले वाहनों पर कार्रवाई से यातायात व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिये यातायात प्रभारी पूरी तरह से नाकाम साबित हो रहे है।

प्रशासन और पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों में चुप्‍पी

स्थानीय नागरिकों का कहना है कि जिला मुख्यालय की यातायात व्यवस्था सीधे तौर पर आम लोगों की सुरक्षा और सुविधा से जुड़ा विषय है। इसलिए पुलिस और प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों को इस मामले में स्पष्ट स्थिति सामने रखनी चाहिए। नागरिकों की मांग है कि पुलिस अधीक्षक विक्रांत मुरान एवं जिला प्रशासन द्वारा नो-एंट्री व्यवस्था की कैसी समीक्षा की जाती है, जिसके कारण यातायात व्‍यवस्‍था दिन प्रतिदिन बद से बदत्‍तर होती जा रही है। आखिकर कार यातायात प्रबंधन के लिये यातायात प्रभारी अपनी जिम्मेदारी से क्‍यो भागते नजर आ रहे है?

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