मामला शा. बालक उच्चतर माध्यमिक विद्यालय राजनगर का
सुमिता शर्मा / राजनगर। शासन के निर्देशानुसार जहां जिले के सभी शासकीय विद्यालयो में माध्यान्ह भोजन की उपलब्ता, भोजन की गुणवत्ता तथा भोजन बनाने के लिए गैस सिलेण्डर उपलब्ध कराए गए है। लेकिन इसके विपरित शासकीय बालक उच्चतर माध्यमिक विद्यालय राजनगर में अध्ययनरत ७३ बच्चो के लिए माध्यान्ह भोजन चूल्हे में बनता है, जिससे निकलने वाले धुएं के बीच पढने को विवश है। वहीं प्रदेश शासन की योजनाओ पर स्कूल प्रबंधन द्वारा पूरी तरह से पानी फेरा जा रहा है। जिसके कारण शासन का माध्यान्ह भोजन की इस योजना में अधिक छात्रों के नामांकन और अधिक छात्रों की नियमित उपस्थिति पर भी प्रभाव पड़ा है।
गुणवत्ता विहीन मिलता भोजन
एक ओर जहां विद्यालय में बच्चो की नियमित उपस्थिति सहित शासन की अनेक योजनाओ को स्कूल प्रबंधन पलीता लगा रहा है। वहीं अव्यस्थाओ के बीच बच्चे पढने को विवश देखे जा रहे है। वहीं बच्चो का कहना है कि स्कूल में उन्हे न तो मीनू के आधार पर भोजन मिलता है और ना ही भोजन गुणवत्तायुक्त है। जो शिक्षा के अधिकार अधिनियम पर सवाल खड़े कर दिया गया है।
रसोईयो को नही मिला तीन माह से वेतन
विद्यालय में उपस्थित रसाईयां रामवती तथा सुंदर वती ने बताया कि स्व-सहायता समूह के संचालक द्वारा हमें जो भी लाकर दिया जाता है हम वहीं बच्चो के लिए खाना बनाते है। इतना ही नही स्कूल प्रबंधन द्वारा हमें गैस सिलण्डेर भी उपलब्ध नही कराया गया। जिसके लिए हमें चूल्हे में कोयला जलाकर खाना बनाना पड़ता है। वहीं कोयला से निकलने वाला धुआं से परेशान भी होना पड़ता है। वहीं अब तक दोनो रसाईयों को तीन माह का वेतन भी नही दिया गया है।


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