खनिज विभाग बना उदासीन, जगह-जगह नदियो का किया जा रहा सीना छलनी
अनूपपुर। जिले में अवैध रेत के उत्खनन एवं परिवहन की लगातार शिकायत के बाद भी जिला प्रशासन खनिज विभाग आंखे मूंदे हुए है। खनिज विभाग की उदासीनता के बाद जहां जिले के अनूपपुर, कोतमा, चचाई एवं वेंकटनगर में रेत के अवैध उत्खनन व परिवहन करते हुए ३ ट्रेक्टर व २ मेटाडोर को जप्त करते हुए पुलिस ने कार्यवाही की है।
अनूपपुर में पकडाई रेत से लोड मेटाडोर वाहन
११ अक्टूबर की रात लगभग १ बजे मानपुर खदान से रेत लोड कर आ रहे वाहन को पुलिस ने रोकते हुए वाहन में लोड रेत से संबंधित दस्तावेज की मांग की गई। लेकिन वाहन चालक नरेन्द्र कोल पिता बिन्नू कोल उम्र २५ निवासी ग्राम हरदी द्वारा मौके पर किसी भी तरह का दस्तावेज नही दिखाया गया, जिसके बाद पुलिस ने वाहन क्रमांक एमपी १८ जीए ४२३३८ करे जब्त करते हुए म.प्र. गौण खनिज अधिनियम के तहत कार्यवाही की गई।
चचाई में पकडाया रेत से लोड ४०७ वाहन
पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार ग्राम बकही में शहडोल-अनूपपुर मार्ग पर स्कूल के पास रेत का अवैध परिवहन करते हुए पुलिस ने वाहन क्रमांक एमपी १८ जीए १४७९ को रोक रेत से संबंधित दस्तावेजो की मांग की गई। जिसके बाद चालक जमुना प्रसाद पिता रूजे यादव निवासी ग्राम तुर्री थाना धनपुरी द्वारा मौके पर रेत से संबंधित किसी भी तरह का दस्तावेज नही दिखाया गया, जिसके बाद चचाई पुलिस द्वारा वाहन को थाने में जब्त करते हुए म.प्र. अवैध खनिज अधिनियम की धारा १८/५ के तहत कार्यवाही की गई।
कोतमा अवैध रेत से लोड दो ट्रेक्टर हुई जब्त
एसडीओपी विजय प्रताप सिंह परिहार के नेतृत्व में थाना प्रभारी राजकुमार मिश्रा, उपनिरीक्षक संजय खलको द्वारा केवई नदी मे रेत चोरी की सूचना के बाद दशि देते हुए दो वाहनो मे रेत चोरी करते वाहन को पकडा गया। वाहन चालको से मौके पर मांगे जाने पर रायल्टी पर्ची एवं वाहन पजीयन के दस्तावेज नही दिखाया जाने तथा पंचायत निर्माण कार्य हेतु उपयोग को बताते हुए फर्जी दस्तावेज पाया गया। जिसके बाद पुलिस ने दोनो वाहन जिसमे आमांडाड निवासी रमेश जायसवाल पिता अमरनाथ निवासी आमांडाड एवं गोरेलाल केवट पिता सीएल केवट निवासी उरा के खिलाफ म.प्र. खनिज उत्खनन परिवहन भण्डारण निवाण अधिनियम 2006 की धारा 18(1), 18(5), के तहत एवं मोटर व्हीकल एक्ट 66/192 , 3/181, 5/180, 146/196 के तहत मामला पंजीबद्ध कर इस्तगासा तैयार कर प्रकरण संबंधित विभाग खनिज एवं कोतमा न्यायालय को भेजा गया है।


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