
कार्यालय मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी अनूपपुर
फर्जी नियुक्ति व एम्लाई कोड के माध्यम से एक्सरे टैक्निशयन से डिप्टी एमईआईओ के पद का रहा सफर
अनूपपुर। प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाओं के अंतर्गत विभिन्न जिलों में फर्जी नियुक्ति आदेश, स्थानांतरण आदेश एवं फर्जी एम्लाईकोड के माध्यम से जालसाजी 119 संदिग्धों को सूचीबद्ध किया गया था। जिसमें मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी कार्यालय अनूपपुर में पदस्थ डिप्टी एमईआईओ के.पी. सिंह की नियुक्ति फर्जी पाई गई है। जहां के.पी. सिंह ने फर्जी नियुक्ति से अपनी पूरी सर्विस भी कर ली और 31 मई 2022 को वह सेवानिवृत्त हो रहे है।
जानकारी के अनुसार के.पी. सिंह की नियुक्ति एक्सरे टैक्निशयन में हुई थी और उसके बाद फर्जी तरीके से जालसाजी कर दो बार प्रमोशन लेकर डिप्टी एमईआईओ के पद तक पहुंच गये। जहां वर्ष 2013 में उनका स्थानांतरण रीवा जिले से सीएमएचओं कार्यालय अनूपपुर किया गया था। जहां आने के बाद उन्होने अपनी तरह की मलेरिया विभाग में 14 लोगो की फर्जी भर्ती करने के साथ ही राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन द्वारा जारी गाइड लाईन के विपरीत जाकर सीएचओं के स्थानांतरण में जांच के दौरान इनकी संल्पितता पाई गई थी। जहां नियम विरूद्ध स्थानांतरण को लेकर क्षेत्रीय संचालक द्वारा के.पी. सिंह को निलंबित कर दिया गया था।
एक्सरे टैक्निशयन में हुई थी नियुक्ति
पूरे मामले में जहां अनुमान वर्ष 1986-87 में सीधी जिले के चुरहट में के.पी. सिंह की नियुक्त एक्सरे टैक्निशयन के पद पर हुई थी। जहां उन्होने एक्सरे टैक्निशय के पद से प्रमोशन लेते हुये बीईई व उसके बाद उप जिला माध्यम विस्तार अधिकारी (डिप्टी एमईआईओ ) के पद तक नियम विरूद्ध तरीके से प्रमोशन ले लिया और वर्ष 2013 में उनका स्थानांतरण रीवा से सीएमएचओं कार्यालय अनूपपुर हो गया। लेकिन फर्जी तरीके से किये गये प्रमोशन आर्डर व नियुक्ति को लेकर शिकायत हुई। जिसकी जांच पुलिस अधीक्षक दतिया व लोकायुक्त संगठन में संचनालय स्तर के गठित समिति द्वारा की गई। जिसमें उक्त आदेश व एम्लाई कोड फर्जी पाये गये और 119 संदिग्धों की सूची बनाई गई थी।
के.बी. सिंह से के.पी. सिंह तक की चली खोज
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| डिप्टी एमईआईओ के.पी. सिंह |
इनका कहना है
मामले की जानकारी है, संपूर्ण दस्तावेज भोपाल भेज दिये गये है।

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