Responsive Ad Slot

ताजा खबर

latest

वेंकटनगर के 11 वर्षीय बच्चे ने दिखाई मानवता की सच्ची सेवा

वेंकटनगर के 11 वर्षीय बच्चे ने दिखाई मानवता की सच्ची सेवा

बुधवार, 15 जून 2022

/ by News Anuppur

मानसिक रूप से बीमार युवक के पेट की आग को बुझाने प्रतिदिन खिलाता है खाना

कहते है, मानवता ही महानतम संपत्ति है और सच्ची मानवता दूसरों की मदद करना है। जिसे अनूपपुर जिला अंतर्गत आने वाले ग्राम पंचायत वेंकटनगर तालाब के पास निवास करने वाले 11 वर्षीय मनीष पट्टा ने कर दिखाया। जिसका परिवार खुद गरीबी का दंश झेल रहा है। इन सबके बीच बच्चे ने उसे समय अपनी मानवता की मिशाल पेश की, जब पिछले एक सप्ताह से पानी टांकी वेंकटनगर के पास बने यात्री प्रतिक्षालय में अज्ञात मानसिक रूप से बीमार युवक भूखा प्यास बैठे रहता, जिसे देख बच्चा उस पर तरस खा गया और उसकी भूख की तड़प को महसूस कर उसके लिये लगातार एक सप्ताह से प्रतिदिन खाने और पानी की व्यवस्था करने के साथ दोनो समय अपने जोड़े हुये पैसे से उसके लिये समोसा वा खाना लेकर जाता। 

अनूपपुर। ग्राम पंचायत वेंकटनगर स्थित पानी टंकी के नीचे बने यात्री प्रतिक्षालय में बीते एक सप्ताह से मानसिक बीमार युवक को भूखे प्यासे बैठा रहता। जिस पर आने जाने वाले लोगो ने उस पर अपनी नजर तक नही डाली, लेकिन 11 वर्षीय मनीष पिता राजेश कुमार को उस विक्षिप्त युवक पर उस समय इतना तरस आया जब उसने पहली बार बच्चे से भूखा होने तथा खाना खिलाने की बात कही। जिसके बाद से बच्चे ने उसके लिये प्रतिदिन खाना पानी की व्यवस्था का इंतजाम करना प्रारंभ कर दिया। इस पूरी घटना को जब हमने देखा और बच्चे से बात कर विक्षिप्त युवक को प्रतिदिन खाना खिलाने का कारण पूछा, तो बच्चे ने बताया कि उस विक्षिप्त युवक को प्रतिदिन घर आने जाने के दौरान देखता था, जहां उसकी किसी के द्वारा मदद न करने पर बच्चे ने ही उसकी मदद के लिये अपना हाथ आगे बढ़ा दिया और उसके लिये प्रतिदिन खाना और पानी की व्यवस्था करने की ठान ली थी।

देखे वीडियो 

 

गरीबी के बाद भी मदद को बढ़ाया हाथ

मनीष पनिका ने बताया कि उसके पिता मजदूरी कर घर चलाते है और वह शासकीय प्राथमिक विद्यालय वेंकटनगर में कक्षा 5वीं में पढ़ता है। जहां ग्रीष्म काॅलीन अवकाश होने पर वह भी मजदूरी करता है, जिसके बदले उसे 150 रूपये प्रतिदिन की मजदूरी मिलती है। बच्चे का जवाब मानवता को शर्मसार करने देने वाला था। जब बच्चे से मजदूरी करने वाली जगह के बारे में पूछा गया तो वह सहम गया और वहां से भाग गया। गरीबी के बीच पले इस बच्चे की सोच असहायो के प्रति दया रखने वा मदद करने वाली थी। 11 वर्ष के इस बच्चे की बाते और सोच हर उन लोगो के मुंह में एैसा जोरदार तमाचा था, जो सिर्फ मानवता की बड़ी-बड़ी बाते कर दूसरों की मदद करने का दिखावा करते है। जिनका मदद सिर्फ कैमरे के सामने ही चलती है। जहां कैमरा चला वहां उनके हाथ मदद को आगे बढ़े, कैमरा बंद असहाय व गरीब की मदद बंद। 





मासूम के साथ रहती पूरी चिल्हर पार्टी

मानसिक रूप से बीमार युवक की मदद करते देख बच्चे के साथ रहने वाले पूरी चिल्हर पार्टी भी उस युवक को नाश्ता कराने पास के होटल में जाते देखा गया, जिसकी तस्वीर असल मानवता की सेवा से मिलने वाली असली संपत्ति के रूप में देखी गई। 11 वर्ष के बालक बड़े असहज महसूस करते हुये बताया कि वह प्रतिदिन मजदूरी करने जाता है, जिसके बदले उसे 150 रूपये प्रतिदिन की मजदूरी मिलता है। उसी रूपये से वह 20 रूपये प्रतिदिन सुबह और शाम उस विक्षिप्त युवक को नाश्ता कराने पास के छोटे से होटल या फिर यात्री प्रतिक्षालय ले जाते और अपने सामने नाश्ता खिलाते और होटल मालिक को नाश्ता का पैसे देते। इस बीच पूरी चिल्हर पार्टी के चेहरे में एक अलग ही खुशी रहती, उनका ये महौल ऐसा लगता की सभी चिल्हर पार्टी कोई खेल खेल रहे हो। वहीं विक्षिप्त युवक भी मनीष के आने का राह तकता और उसके आते ही बिना कुछ बोले उनके साथ चल देता। 

बच्चे ने कमाई मानवता की महानतम संपत्ति

जब मनीष पनिका से अज्ञात विक्षिप्त को खाना व नाश्ता कराये जाने का कारण पूछा गया तो बच्चे ने जवाब में कहा वह भूखा है बेचारा! कक्षा 5वीं में पढ़ने वाले इस बच्चे का मानवता के प्रति प्यार तथा भूख की तड़प से गहरा नाता होगा, जिसके कारण बच्चा भूख से होने वाले दर्द को समझा। जहां बच्चे द्वारा की गई बिना किसी लालच के मदद और स्वयं कमाये गये पैसे से 40 रूपये विक्षिप्त के पेट की आग को बूझाने में लगा दी। हमारे संवाददाता ने बच्चे की मजदूरी करने वाली जगह का पता लगाने का प्रयास किया गया, लेकिन बच्चा को कुछ एहसास हुआ और वह वहां से भाग गया। लेकिन विक्षिप्त को खाना खिलाने अपने समय पर पहुंच जाता था। 


कोई टिप्पणी नहीं

एक टिप्पणी भेजें

'
Don't Miss
© all rights reserved
made with NEWSANUPPUR